Chandigarh, 17 July
ट्राइसिटी क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फोर्टिस अस्पताल मोहाली ने डीप ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (डीटीएमएस) थेरेपी की शुरुआत की है। यह एफडीए-स्वीकृत, नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो पारंपरिक दवाओं और मनोचिकित्सा से लाभ नहीं ले सके।
चार माह पूर्व आरंभ की गई इस थेरेपी से अब तक 15 ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। डीटीएमएस तकनीक को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह मस्तिष्क के गहराई वाले हिस्सों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके, जहाँ पारंपरिक रेपेटिटिव टीएमएस की पहुंच नहीं होती, जिससे यह कठिन मानसिक स्थितियों में अधिक प्रभावशाली सिद्ध हो रही है।
प्रेस वार्ता में फोर्टिस मोहाली के एडिशनल डायरेक्टर – साइकेट्री, डॉ. हरदीप सिंह ने बताया कि एक 40 वर्षीय महिला, जो पिछले 16 वर्षों से गंभीर ओसीडी से पीड़ित थी, डीटीएमएस थेरेपी से इलाज के बाद सामान्य जीवन में लौट पाई है। छह सप्ताह की थेरेपी के बाद उसका येल-ब्राउन स्केल स्कोर 32 से घटकर 13 हो गया, जो हल्के लक्षणों को दर्शाता है।
डॉ. सिंह ने बताया, “डीटीएमएस थेरेपी सुरक्षित, सटीक और दीर्घकालिक राहत देने वाली प्रक्रिया है, जो दवाओं के दुष्प्रभावों से मुक्त है।” यह तकनीक विशेष मस्तिष्क क्षेत्रों में मैग्नेटिक पल्स भेजती है और ओसीडी के साथ-साथ PTSD, एंग्ज़ायटी, क्रॉनिक पेन, माइग्रेन और निकोटिन की लत जैसी समस्याओं में भी असरदार पाई गई है। साथ ही, शोधकर्ता इसके उपयोग को पार्किंसन, टूरेट सिंड्रोम और ऑटिज़्म जैसे रोगों के लिए भी खोज रहे हैं।थेरेपी में आम तौर पर 4–6 सप्ताह की अवधि में 20–30 सत्रों की आवश्यकता होती है। यह पूरी तरह से गैर-इनवेसिव होती है, जिसमें मरीज पूर्णतः जागरूक रहते हैं और किसी एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती।
नया नजरिया
फोर्टिस मोहाली की यह पहल मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय और सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है, जो तकनीक और चिकित्सा के मेल से जटिल मानसिक रोगों में आशा की नई किरण लेकर आई है।