नई दिल्ली | संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त 2025 तक चलेगा। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले आज राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार ने सभी दलों की बैठक बुलाई, जिसमें कई पार्टियों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य सत्र को सुचारू रूप से चलाने को लेकर सहमति बनाना था।
इस अहम बैठक में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, किरण रिजिजू, कांग्रेस नेता सुरेश और जयराम रमेश, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, एनसीपी-एससीपी की सुप्रिया सुले, बीजेपी सांसद रवि किशन, सपा, जेडीयू, डीएमके, एआईएडीएमके और अन्य दलों के नेता मौजूद रहे।
विपक्ष के निशाने पर सरकार, उठेंगे कई बड़े मुद्दे
इस बार का सत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यह 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले और 7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार हो रहा है। इसके अलावा बिहार में मतदाता सूची में बदलाव, वक्फ अधिनियम, और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने जैसे मुद्दे भी विपक्ष के निशाने पर हैं।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बताया कि विपक्ष ने चार बड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया है—
- पहलगाम हमला और उसमें हुई सुरक्षा चूक
- ऑपरेशन सिंदूर में विदेश नीति की विफलता
- बिहार में मतदाता सूची में बदलाव
- जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा
सरकार ला सकती है कई अहम विधेयक
मानसून सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण बिलों को पेश करने और पास करवाने की तैयारी में है, जिनमें शामिल हैं:
- जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2025
- कराधान कानून (संशोधन) विधेयक
- राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025
- राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक
- खान और खनिज (संशोधन) विधेयक
- विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण) विधेयक
13 और 14 अगस्त को नहीं होगी संसद की बैठक
स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर 13 और 14 अगस्त को संसद की कार्यवाही नहीं होगी। इस बार का सत्र विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहसों और रणनीतिक राजनीतिक संघर्षों से भरा हो सकता है। सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि किसका पलड़ा भारी रहेगा।