जालंधर |सेंट्रल हलके से आम आदमी पार्टी के विधायक रमन अरोड़ा के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार केस में अब एक और बड़ा मोड़ आ गया है। विजिलेंस विभाग ने अदालत में 6000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें न सिर्फ रमन अरोड़ा बल्कि उनके बेटे राजन अरोड़ा, समधी राजू मदान, निगम की महिला इंस्पेक्टर हरप्रीत कौर और सहयोगी महेश मखीजा को भी आरोपी बनाया गया है।
चार्जशीट में दावा किया गया है कि विधायक रहते हुए रमन अरोड़ा ने नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर्स को नोटिस भिजवाकर उन्हें परेशान किया और फिर मोटी रकम लेकर बिल्डिंगों की सील खुलवाई। आरोप है कि यह पूरा रैकेट उनके दफ्तर से ऑपरेट होता था और इसमें करोड़ों का लेनदेन हुआ।
इतना ही नहीं, चार्जशीट में बैंक लेनदेन, बेनामी संपत्तियों और परिवार के अन्य सदस्यों व कंपनियों की जानकारी भी शामिल की गई है। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, चार्जशीट तय समय से पहले अदालत में दाखिल कर दी गई है। इस केस पर अब अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
अभी फरार है समधी, बेटे का नाम भी चार्जशीट में
विधायक का समधी राजू मदान अब भी फरार बताया जा रहा है। वहीं, बेटे राजन अरोड़ा पर भी केस में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने उन सभी लोगों के बयान भी चार्जशीट में जोड़े हैं, जिनसे विधायक ने कथित रूप से पैसे वसूले।
बेनामी संपत्तियों पर अलग से चार्जशीट की तैयारी
विजिलेंस जांच में रमन अरोड़ा द्वारा विधायक रहते हुए कई बेनामी संपत्तियां खरीदने के सबूत भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में भी जल्द ही एक अलग चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी। कुछ नेताओं के नाम भी जांच में सामने आए हैं।
मंदिर से हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि 23 मई की सुबह मंदिर में माथा टेकते समय विजिलेंस टीम ने विधायक रमन अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके करीबी और नगर निगम अधिकारी भी पकड़े गए। जांच में सामने आया कि शहर के एक चर्चित पुलिस अधिकारी को भी विधायक का संरक्षण प्राप्त था, जिसे अब ट्रांसफर किया जा चुका है और पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
यह मामला न केवल भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह सत्ता का इस्तेमाल कर एक संगठित नेटवर्क के जरिए करोड़ों की वसूली की गई।