नई दिल्ली | कांगड़ा में चक्की रेलवे पुल को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पुल की नींव बह गई है और एक बड़ी दुर्घटना टल गई। लेकिन उत्तर रेलवे ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ किया है कि पुल पूरी तरह से सुरक्षित है और रेल संचालन में किसी तरह का खतरा नहीं है।
रेलवे की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 20 और 21 जुलाई को पठानकोट कैंट–कंदरोड़ी सेक्शन में बाढ़ के कारण जलस्तर बढ़ा, लेकिन पुल पर पहले से ही 20 किमी प्रति घंटे की गति सीमा लागू थी।
रेलवे के मुताबिक, मीडिया जिन हिस्सों को पुल की नींव बता रहा है, वो वास्तव में ढलान पर लगी क्लैडिंग थी, जो पहले से हटाई जानी थी और उसका कोई तकनीकी महत्व नहीं था। तेज बहाव के चलते यह हिस्सा नदी में बह गया, लेकिन इससे पुल की संरचना या रेल संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
सुरक्षा के लिए रेलवे ने उठाए ये कदम:
- पुल की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए गार्ड तैनात किए गए हैं।
- सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है।
- मुख्य पुल इंजीनियर ने खुद मौके का निरीक्षण किया।
- जलस्तर कम होते ही पाइल फाउंडेशन का काम दोबारा शुरू किया जाएगा।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, चक्की पुल रेल संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और इस पर सतत निगरानी रखी जा रही है।