Shimla, Sanju
हिमाचल प्रदेश में बार-बार हो रही बादल फटने की घटनाओं को लेकर अब वैज्ञानिक अध्ययन शुरू कर दिया गया है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ टीम शिमला पहुंची। टीम ने राज्य के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। बैठक में राज्य में हुई घटनाओं का विस्तृत डेटा केंद्रीय टीम के साथ साझा किया गया।
मानसून सीजन में अब तक 25 बादल फटने की हुई घटनाएं
इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में 25 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें मंडी जिले में सबसे अधिक 15 मामले सामने आए हैं। बादल फटने के कारण जान-माल की भारी क्षति हो रही है, जिसको लेकर गहन वैज्ञानिक विश्लेषण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।केंद्रीय टीम में सीएसआईआर रुड़की के चीफ साइंटिस्ट कर्नल केपी सिंह, मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एसके नेगी, मणिपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व जियोलॉजिस्ट अरुण कुमार, आईआईटीएम पुणे की रिसर्चर सुष्मिता और आईआईटी इंदौर की सिविल इंजीनियर नीलिमा शामिल हैं।
पहली बार इस प्रकार का हो रहा वैज्ञानिक अध्ययन
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सचिव एवं निदेशक डीसी राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के आग्रह पर यह टीम अध्ययन के लिए हिमाचल भेजी गई है। टीम कल फील्ड से लौटने के बाद मौसम विज्ञान केंद्र शिमला, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य एजेंसियों से आंकड़े जुटाकर विश्लेषण करेगी। डीसी राणा ने कहा कि यह संभवतः पहली बार है जब इस प्रकार का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन हो रहा है।
“इस बार भी मानसून ने काफी नुकसान पहुंचाया है। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून बहुत प्रभावशाली रहा। दो दिन पहले लाहौल-स्पीति में भी बादल फटा, हालांकि इसमें कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन खेतों में मलबा घुस गया। चंबा के भरमौर में दो लोगों की दुखद मृत्यु हुई है।”
“अब तक इस मानसून में हिमाचल प्रदेश में 114 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें कई सड़क हादसे भी शामिल हैं। प्रदेश को अब तक लगभग 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। हालांकि इस समय कोई बड़ा अलर्ट नहीं है, लेकिन छोटी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।”