चंडीगढ़ | हरियाणा कांग्रेस ने लंबे इंतजार के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चौथी बार विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त कर दिया है। राज्य में भाजपा सरकार के गठन के बाद लगभग एक साल तक विधानसभा तीन सत्र बिना विपक्ष के नेता के चले। शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय ने हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की अधिसूचना जारी की।
हुड्डा अब चंडीगढ़ के सेक्टर सात स्थित 70 नंबर कोठी में कार्यरत रहेंगे, जहां वे पिछले एक साल से रह रहे थे। कांग्रेस के सात विधायकों : चौधरी आफताब अहमद, गीता भुक्कल, इंदुराज नरवाल, जस्सी पेटवाड़, देवेंद्र हंस, बलराम दांगी और विकास सहारण ने 30 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण को पत्र सौंपकर हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाने की सिफारिश की थी।
हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के 37 और इनेलो के 2 विधायक हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 48 विधायकों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में है। नेता प्रतिपक्ष को वेतन, भत्ते, कोठी, गाड़ी, स्टाफ और कार्यालय की सुविधा के साथ कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
हुड्डा का राजनीतिक रिकॉर्ड:
हुड्डा रोहतक जिले की गढ़ी-सांपला किलोई सीट से छठी बार विधायक हैं और चौथी बार नेता प्रतिपक्ष बने हैं। इससे पहले वे अगस्त 2002, सितंबर 2019 और नवंबर 2019 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में केवल ओम प्रकाश चौटाला दो बार नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।
कानूनी दर्जा और सुविधाएं:
हरियाणा विधानसभा (सदस्यों का वेतन, भत्ते और पेंशन) अधिनियम 1975 के तहत नेता प्रतिपक्ष का पद वैधानिक रूप से कैबिनेट मंत्री के समकक्ष माना जाता है। इस पद पर वेतन व भत्तों पर इनकम टैक्स का भुगतान राज्य सरकार करती है।
हुड्डा का बयान:
“मुझे विपक्ष का नेता बनाने में कोई देरी नहीं हुई। कांग्रेस के सभी विधायक दल के नेता चुनने का अधिकार हाईकमान को सौंप चुके थे। संगठन को मजबूत करने के लिए सभी जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए और राव नरेंद्र प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। मैं अपने नियुक्ति के लिए कांग्रेस हाईकमान का आभार व्यक्त करता हूं।”