चंडीगढ़ | हरियाणा के 59 साल के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस पार्टी ने सबसे लंबे समय तक सत्ता संभाली है। आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस ने राज्य में 31 साल 7 महीने तक शासन किया, जबकि विभिन्न दलों ने अलग-अलग अवधियों के लिए सत्ता संभाली।
राज्य के गठन के बाद राव बीरेंद्र सिंह की विशाल हरियाणा पार्टी ने करीब 224 दिन तक सत्ता चलाई। इसके बाद जनता पार्टी के शासनकाल में चौधरी देवीलाल ने 738 दिन (लगभग दो साल) तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
जनता दल की सरकार करीब सवा चार साल तक चली, जिसमें चौधरी देवीलाल, चौधरी ओमप्रकाश चौटाला, बनारसी दास गुप्ता और मास्टर हुकम सिंह मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद हरियाणा विकास पार्टी ने लगभग तीन साल तक शासन किया, जबकि इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) की सरकार ने करीब साढ़े पांच साल तक प्रदेश की कमान संभाली।
वर्ष 2014 से अब तक भाजपा सरकार राज्य की सत्ता में है, जो अब लगातार 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। राज्य में अब तक तीन बार राष्ट्रपति शासन भी लागू हो चुका है, जो कुल मिलाकर लगभग एक वर्ष (365 दिन) तक रहा।
1967 से 2024 तक हुए 14 विधानसभा चुनावों में केवल तीन मौकों पर ही पूर्ण बहुमत की सरकारें बनीं, जबकि शेष अवसरों पर या तो गठबंधन या जोड़-तोड़ से सरकारें बनीं। कई बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति भी बनी, जिससे राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली।
हरियाणा का यह राजनीतिक सफर दर्शाता है कि राज्य की राजनीति हमेशा से दल-बदल और गठबंधन की रणनीतियों से प्रभावित रही है, लेकिन सत्ता में सबसे स्थायी और प्रभावशाली दौर कांग्रेस का ही रहा है।