मालदीव । भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत भारत और मालदीव के बीच सहयोग का एक और मजबूत उदाहरण सामने आया है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत की 80 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता से निर्मित हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भव्य उद्घाटन किया।
राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि यह हवाई अड्डा केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि “उत्तरी मालदीव की समृद्धि और आर्थिक परिवर्तन का प्रतीक” है। उन्होंने इसे देश के लिए “समृद्धि का प्रवेश द्वार” बताते हुए कहा कि यह विकास और वैश्विक संपर्क का नया युग खोलेगा।
भारत-मालदीव सहयोग की मिसाल
भारत के एक्जिम बैंक द्वारा दी गई 80 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता इस परियोजना का प्रमुख वित्तीय आधार रही है। यह फंडिंग 2019 में मालदीव सरकार और बैंक के बीच हुए समझौते के तहत प्रदान की गई।
इस परियोजना को भारत ने अपनी “पड़ोसी प्रथम नीति” और “महासागर दृष्टिकोण (SAGAR)” के तहत शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सतत विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है।
समारोह में भारतीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति
हवाई अड्डे के उद्घाटन समारोह में भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, मालदीव सरकार के मंत्री और दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। भारतीय उच्चायोग ने इसे भारत-मालदीव मित्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि हनीमाधू एयरपोर्ट “प्रगति और समृद्धि का सच्चा माध्यम” है।
हनीमाधू एयरपोर्ट से खुले विकास के नए रास्ते
राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि यह हवाई अड्डा पर्यटन, कृषि, मत्स्य पालन और स्थानीय उद्योगों को नई गति देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस एयरपोर्ट के माध्यम से उत्तरी मालदीव के लोगों को रोजगार और व्यवसाय के अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।