फरीदाबाद | फरीदाबाद में 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद होने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के तहत अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सोमवार देर रात पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। यूनिवर्सिटी परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी — डॉ. आदिल अहमद राठर, डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई उर्फ मुजम्मिल शकील, और डॉ. शाहीन शाहिद — सभी का संबंध इसी यूनिवर्सिटी से है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद विस्फोटक सामग्री का तार एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जिसकी जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी कर रही हैं।
गल्फ फंडिंग से जुड़ी यूनिवर्सिटी पर जांच की नजर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल-फलाह यूनिवर्सिटी को गल्फ देशों से फंडिंग प्राप्त होती रही है। विस्फोटक बरामदगी के बाद से यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर तगा क्षेत्रों से बरामद विस्फोटक एक तथाकथित “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” का हिस्सा हो सकता है।
‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ क्या है?
सूत्रों का कहना है कि इस मॉड्यूल में ऐसे शिक्षित और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित लोगों को शामिल किया जाता है, जिन पर सामान्यतः किसी को संदेह नहीं होता। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि कई डॉक्टर और शिक्षित पेशेवर इस नेटवर्क के माध्यम से जुड़े हो सकते हैं।
चार जमाती हिरासत में, मस्जिदों में सर्च ऑपरेशन
पुलिस ने फरीदाबाद के फतेहपुर तगा गांव की मस्जिदों में भी सर्च अभियान चलाया। जानकारी के अनुसार, आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील नियमित रूप से तगा मस्जिद में नमाज पढ़ने आता था। जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और नूंह से आए जमातियों से पूछताछ की गई।
संदेह के आधार पर चार जमातियों को हिरासत में लिया गया है, जिनके मोबाइल से मिली वॉट्सऐप चैट्स और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।