Shimla, Sanju
बाल दिवस के अवसर पर बुधवार को राजधानी शिमला का ऐतिहासिक रिज मैदान बच्चों की खुशियों से सराबोर रहा।महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ स्पोर्ट्स और कल्चरल मीट का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बच्चों के साथ समय बिताया और उन्हें प्रोत्साहन दिया।
सुख आश्रय कानून से अनाथ बच्चों को मिली नई पहचान
कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस बैंड ‘हार्मनी ऑफ द पाइनस’ की मधुर धुनों से हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू भी बच्चों के बीच पहुंचे और संगीत की धुनों पर उनके साथ झूमते दिखे। बच्चों के साथ उनका सहज और आत्मीय व्यवहार देखने योग्य था, जिससे पूरा रिज मैदान उत्सव स्थल में तब्दील हो गया।मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अनाथ और निराश्रित बच्चों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘सुख आश्रय कानून’ लागू किया है। उन्होंने बताया कि यह पहल हिमाचल को देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल करती है, जहां जन्म से 27 वर्ष की आयु तक अनाथ बच्चों की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार निभाती है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे किसी सरकारी लाभ के पात्र भर नहीं, बल्कि राज्य के परिवार का हिस्सा हैं और सरकार उनके माता-पिता की भूमिका निभा रही है।उन्होंने कहा कि बाल दिवस का यह आयोजन इन बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का एक प्रयास है। खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ विकसित होगी।
राजनीति में नैतिकता पर भाजपा पहले खुद देखे
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंच से अपने राजनीतिक विरोधियों को भी जवाब दिया। उन्होंने भाजपा द्वारा सरकार के तीन साल के जश्न को लेकर उठाए गए सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को पहले अपनी आंतरिक स्थिति पर नजर डालनी चाहिए। सोलन और चंबा की घटनाओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि नैतिकता का पाठ वही लोग पढ़ाएं जिनके पास नैतिकता शेष हो।उन्होंने साफ किया कि सरकार का यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि जनता के सामने अपने किए गए कार्यों की जानकारी साझा करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और जनता को किए गए कामों के बारे में बताना किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली का हिस्सा है।बाल दिवस का यह आयोजन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान और उनके भीतर नए उत्साह का संचार कर गया। खेल प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न गतिविधियों में प्रतिभाग करने वाले बच्चों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाए दीं।