Dharamshala, Rahul-:कांगड़ा की पर्यटन नगरी में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कैंपस में आज 16वीं तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ। भारत सहित विभिन्न देशों से करीब 150 प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन की संभावनाओं को टिकाऊ विकास, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है। यह सम्मेलन पर्यटन मंत्रालय के ICCSR, इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटालिटी कांग्रेस और केंद्रीय विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया है।
सम्मेलन की थीम “सस्टेनेबल टूरिज्म एंड वेलनेस” रखी गई है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सतप्रकाश बंसल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पर्यटन क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान—USP—स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जैसे केरल हेल्थ टूरिज्म, राजस्थान हैरिटेज टूरिज्म और कर्नाटक मेडिकल टूरिज्म के लिए जाना जाता है, उसी तरह हिमाचल को भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान के रूप में पेश किया जाना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि प्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने धर्मशाला की वैश्विक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां निर्वासित तिब्बती सरकार और बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का निवास होना हिमाचल के लिए एक बड़ा आकर्षण है। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षणों के अनुसार दुनिया के आठ देशों पर बौद्ध संस्कृति का सीधा प्रभाव है, जहां से बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी धर्मशाला का रुख कर सकते हैं, यदि इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए।
प्रो. बंसल ने कहा कि पर्यटन विकास में दक्षता और निपुणता की कमी अभी भी महसूस की जाती है, जबकि प्रधानमंत्री स्वयं भारत के सबसे बड़े पर्यटन ब्रांड एम्बेसडर हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत में 22 मिलियन सैलानी आए, जिनमें से अधिकतर NRI थे। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय विशेष कोर्स व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा, जिससे पर्यटन उद्योग में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।