चंडीगढ़। सरकारी नौकरियों में खेल कोटे के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। खेल विभाग द्वारा राज्य सरकार को भेजी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में कई खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध, अमान्य और यहां तक कि फर्जी पाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनेक सर्टिफिकेट मान्यता प्राप्त राज्य संघों, राष्ट्रीय महासंघों या इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन से संबद्ध संस्थाओं द्वारा जारी नहीं किए गए थे।
बिना मान्यता के जारी किए गए प्रमाणपत्र
जांच में पता चला कि कई एसोसिएशनों ने बिना किसी आधिकारिक मान्यता के खिलाड़ियों को खेल प्रमाणपत्र जारी कर दिए। विभाग ने खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट की सूची बनाकर संबंधित फेडरेशनों को सत्यापन के लिए भेजा। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे प्रमाणपत्र मिले जिन पर संबंधित संघों ने “फर्जी”, “अमान्य” और “संघ से संबद्ध नहीं” जैसी टिप्पणियां दर्ज कीं।
ताइक्वांडो, एथलेटिक्स और कबड्डी में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
रिपोर्ट के अनुसार ताइक्वांडो, एथलेटिक्स, वॉलीबाल, थ्रोबाल और सर्कल कबड्डी में बड़े स्तर पर अनियमितताएं मिलीं।
- ताइक्वांडो: कई खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र मान्य नहीं पाए गए। न राज्य संघ की मान्यता थी न राष्ट्रीय फेडरेशन की।
- एथलेटिक्स: कई सर्टिफिकेट सीधे फर्जी घोषित किए गए। संघों ने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों का रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है।
- वॉलीबाल व थ्रोबाल: कई उपलब्धियां असत्य पाई गईं।
- कबड्डी: प्रमाणपत्र न मान्यता प्राप्त संघ से जारी थे और न ही उस वर्ष कोई अधिकृत प्रतियोगिता आयोजित हुई थी।
पुरानी तिथि वाले फर्जी सर्टिफिकेट भी सामने आए
जांच में सामने आया कि कई खिलाड़ियों ने 2012, 2014, 2016 और 2018 की प्रतियोगिताओं के नाम पर प्रमाणपत्र जमा कराए, जबकि संबंधित संघों ने ऐसे आयोजनों के होने से ही इनकार कर दिया।
कुछ मामलों में उम्मीदवार असली और नकली दोनों प्रकार के दस्तावेज लेकर पहुंचे।
कई खिलाड़ियों ने जूनियर कैटेगरी के प्रमाणपत्रों को सीनियर कैटेगरी के रूप में नौकरी में लगाया, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
भर्तियों की पारदर्शिता पर उठे सवाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि खेल कोटे के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर नौकरियां हासिल करने की कोशिश से न केवल प्रणाली पर सवाल उठते हैं, बल्कि वास्तविक खिलाड़ियों का अधिकार भी प्रभावित होता है।
सरकार ने सभी जिलों को दिए सख्त निर्देश
खेल विभाग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने निर्देश जारी करते हुए कहा है:
- भविष्य की सभी भर्तियों में 100% खेल प्रमाणपत्रों का सत्यापन अनिवार्य होगा।
- फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
सबसे ज्यादा हिसार, जींद और फतेहाबाद के खिलाड़ी शामिल
फर्जी या संदिग्ध प्रमाणपत्रों की सूची में शामिल खिलाड़ियों की संख्या:
- हिसार – 36
- जींद – 31
- फतेहाबाद – 20
- चरखी दादरी – 8
- पानीपत – 13
- महेंद्रगढ़ – 9
- सोनीपत – 6
- कैथल – 6
- करनाल – 4
- रोहतक – 3
- कुरुक्षेत्र – 2
- भिवानी – 2
- रेवाड़ी, सिरसा, झज्जर – 1-1 खिलाड़ी
अधिकारी का बयान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यालय की ओर से जिलों को लगभग 20 खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट रद्द करने के निर्देश भेजे गए हैं।
उन्होंने कहा, “जिस एसोसिएशन से खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र मिले, उस समय वे संघ मान्यता प्राप्त नहीं थे। इस कारण प्रदेशभर में करीब 143 प्रमाणपत्र रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।”