Shimla, 24 November-:नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में नशे के बढ़ते दुरुपयोग और पुनर्वास केंद्रों की अव्यवस्थाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नशा-निवारण को लेकर सरकार की नीतियाँ केवल हैडलाइन और इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित दिखाई देती हैं, जबकि प्रदेश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार शिमला जिले की 412 में से 265 पंचायतें नशे की चपेट में आ चुकी हैं, जिनमें से 145 पंचायतों में स्थिति गंभीर है। उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा पंचायतों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करने के बाद भी जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठते नहीं दिख रहे। उन्होंने कई दर्दनाक घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि कई परिवार नशे की वजह से बर्बादी की कगार पर पहुंच चुके हैं।उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह एक निजी नशा-निवारण केंद्र में मरीज की हत्या जैसी घटना ने निजी पुनर्वास संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगभग 102 पंजीकृत निजी पुनर्वास केंद्रों में से 40 बंद किए जा चुके हैं, जिनमें हिंसा और कुप्रबंधन की घटनाएँ सामने आई हैं। कई केंद्र बिना चिकित्सा विशेषज्ञों और दवाइयों के उपचार चला रहे थे, जिससे मरीजों की स्थिति और बिगड़ रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पुनर्वास सुविधाए लगभग नगण्य हैं। प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में नशा-उपचार हेतु अलग वार्ड उपलब्ध नहीं है और मनोचिकित्सा विभागों में बिस्तरों की संख्या भी नहीं बढ़ाई गई है, जिसके कारण लोगों को महंगे निजी केंद्रों पर निर्भर होना पड़ता है।उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकारी स्तर पर पुनर्वास ढांचे को मजबूत किया जाए और नशा पीड़ितों को अपराधी नहीं, बल्कि मरीज की तरह उपचार दिया जाए।