Hamirpur, Arvind-:हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती की दिशा में हो रहे प्रयास अब सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। प्रदेश के अनेक किसान इस किफायती, पर्यावरण–अनुकूल और जहरमुक्त खेती पद्धति को अपनाकर न केवल अपनी उपज को सुरक्षित और पौष्टिक बना रहे हैं, बल्कि इससे सम्मानजनक आय भी अर्जित कर रहे हैं। जिला हमीरपुर के नादौन उपमंडल की ग्राम पंचायत कमलाह के गांव साधबड़ के अमर सिंह भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाकर अपनी किस्मत और जमीन—दोनों को संवार लिया है।
अमर सिंह पहले अपनी पुश्तैनी जमीन पर रासायनिक खाद और कीटनाशकों के प्रयोग से खेती करते थे। इससे जहां खेती का खर्च बढ़ रहा था, वहीं मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी घटती जा रही थी। रासायनिक दवाओं के प्रभाव से उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी और परिवार के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने लगा था। इसी बीच प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजना का उन्हें लाभ मिला। योजना के तहत अमर सिंह को दो दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया और प्राकृतिक खेती हेतु आवश्यक सामग्री व संसाधनों, जैसे ड्रम आदि, पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण के बाद अमर सिंह ने पूरी तरह प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाया। वह स्वयं ही गोबर, गोमूत्र, शक्कर और बेसन से जीवामृत तैयार करते हैं और खेतों में इसी का नियमित छिड़काव करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनकी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आज अमर सिंह आलू, प्याज, लहसुन, बैंगन, गोभी सहित विविध सब्जियां, सरसों एवं अन्य फसलें प्राकृतिक तरीके से उगा रहे हैं। इनकी ताजगी, स्वाद और जहरमुक्त गुणवत्ता के कारण स्थानीय बाजार में इन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं। परिवार की जरूरतें पूरी करने के बाद वह सालाना लगभग एक लाख रुपये तक की सब्जियां बेचकर आय अर्जित कर रहे हैं।
सब्जियों के साथ-साथ अमर सिंह ने अमरूद, पपीता, कीवी और अन्य फलदार पौधों का रोपण भी किया है। उनका कहना है कि प्राकृतिक खेती के लिए प्रदान की जा रही सब्सिडी और इससे तैयार उत्पादों के लिए निर्धारित उच्च मूल्य किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इससे प्रदेश में खेती की नई संभावनाएं खुली हैं और किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।