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अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. चमन का शोधपत्र: अंबेडकर की आर्थिक सोच को बताया आधुनिक भारत की रीढ़

Mandi, Dharamveer-:भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर 6–7 दिसंबर 2025 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस महाविद्यालय, हमीरपुर द्वारा “एनवायरनमेंट, कल्चर एंड स्पिरिचुअलिटी” तथा “लाइफ़ एंड कंट्रीब्यूशन ऑफ़ डॉ. बी.आर. अंबेडकर” विषयों पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इस द्विदिवसीय आयोजन में वल्लभ राजकीय महाविद्यालय, मंडी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. चमन लाल क्रांति सिंह ने ऑनलाइन माध्यम से अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया।

“आधुनिक भारत में समावेशित विकास और सतत राष्ट्रनिर्माण में डॉ. अंबेडकर के आर्थिक विचारों का योगदान” विषय पर आधारित अपने शोध में डॉ. चमन ने स्पष्ट किया कि संविधान निर्माता होने के साथ-साथ डॉ. अंबेडकर एक उत्कृष्ट अर्थशास्त्री भी थे, जिनकी दूरदर्शिता ने भारतीय आर्थिक ढांचे को मजबूत आधार दिया। उन्होंने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अमर्त्य सेन और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. जयंदरे, दोनों ही अंबेडकर की समावेशी आर्थिक दृष्टि से प्रभावित रहे हैं।

डॉ. चमन के अनुसार डॉ. अंबेडकर की अद्वितीय शैक्षणिक यात्रा—कोलंबिया विश्वविद्यालय से लेकर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तक—उन्हें विश्व के उन चुनिंदा विद्वानों की श्रेणी में स्थापित करती है जिन्होंने अनेक उच्च कोटि की डिग्रियाँ अर्जित कीं। उनकी ऐतिहासिक पुस्तक “द प्रॉब्लम ऑफ द रूपी” के आधार पर ही भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो उनके वैज्ञानिक आर्थिक चिंतन का सशक्त प्रमाण है।उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वायसरॉय काउंसिल के श्रम मंत्री के रूप में अंबेडकर ने दामोदर घाटी परियोजना, सोन नदी योजना और भाखड़ा नांगल जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों की नींव रखी। न्यूनतम मजदूरी, मातृत्व लाभ, सुरक्षित कार्य-स्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा पर उनके विचार आज की श्रम-नीति की रीढ़ हैं।

अपने शोधपत्र में डॉ. चमन ने कहा कि अंबेडकर का मूल आर्थिक संदेश यह था कि आर्थिक असमानता, सामाजिक अन्याय की जड़ है। यही कारण है कि उनका समावेशी विकास मॉडल आज मनरेगा, जन-धन योजना और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के रूप में वास्तविक रूप से दिखाई देता है।मीडिया विमर्श के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मीडिया अक्सर अंबेडकर को केवल सामाजिक न्याय के आयाम से जोड़ता है, जबकि उनकी आर्थिक सोच वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है और “विकसित भारत 2047” की यात्रा में मार्गदर्शक सिद्ध होती है।

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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