चंडीगढ़। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी के भीतर इसे लेकर उलटी गिनती शुरू मानी जा रही है और संभावना जताई जा रही है कि सोमवार तक अध्यक्ष पद के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व की ओर से चुनाव प्रक्रिया का शेड्यूल और पर्यवेक्षक की घोषणा जल्द की जाएगी, जिसके बाद औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जाएगा।
वर्तमान में मोहन लाल बड़ौली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें दोबारा मौका देने के संकेत दिए हैं, हालांकि पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता इस पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद को लेकर संगठन के अंदर मंथन तेज हो गया है।
सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार देर रात दिल्ली में मोहन लाल बड़ौली की केंद्रीय नेतृत्व के एक वरिष्ठ नेता के साथ अहम बैठक हुई। यह बैठक करीब आधे घंटे चली, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया और समय-सारिणी पर चर्चा हुई। इसी बैठक के बाद चुनाव का नोटिफिकेशन जारी करने और सोमवार को चयन प्रक्रिया पूरी करने पर सहमति बनी। तय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार को पर्यवेक्षक की मौजूदगी में इच्छुक उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे और उसी दिन एक नाम पर सहमति बन सकती है।
प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी मार्च महीने से ही शुरू कर दी गई थी। केंद्रीय नेतृत्व ने पहले ही राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह को हरियाणा के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया था। अब प्रदेश स्तर के पर्यवेक्षक की घोषणा के साथ ही चुनावी प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया जाएगा। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आवेदन, नामांकन की जांच और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद अरुण सिंह की अध्यक्षता में बैठक कर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी।
हरियाणा भाजपा संगठन में प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए कुल 117 मतदाता हैं। इनमें 27 जिला अध्यक्ष और 90 मंडल या हलका अध्यक्ष शामिल हैं। चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए इन सभी मतदाताओं को रोहतक या पंचकूला स्थित पार्टी कार्यालयों में बुलाए जाने की संभावना है।
प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में कई नाम चर्चा में हैं। मोहन लाल बड़ौली जहां अपने कार्यकाल में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी की सफलता का दावा कर रहे हैं, वहीं संजय भाटिया, असीम गोयल, सुदेश कटारिया और अजय गौड़ जैसे नेता भी संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों के आधार पर मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रीय नेतृत्व अनुभव, संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संतुलन में से किस आधार पर अंतिम फैसला करता है।