Karnal, 18 December-:प्रदेश में इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड और सुबह–शाम छाए घने कोहरे ने भले ही आम जनजीवन को प्रभावित किया हो, लेकिन यही मौसम गेहूं की फसल के लिए किसी अमृत से कम नहीं माना जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा मौसम गेहूं की बढ़वार के लिए बेहद अनुकूल है और यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो इस बार किसानों को बंपर पैदावार मिल सकती है।
बुधवार को पूरे क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह के समय घनी धुंध के कारण दृश्यता काफी कम रही, जबकि दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। तापमान में आई गिरावट से ठंड का असर और तेज हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यही ठंड गेहूं की जड़ों को मजबूत करने और पौधों की बेहतर वृद्धि में सहायक साबित होती है।
करनाल स्थित राष्ट्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पड़ रही ठंड और सुबह का कोहरा गेहूं की फसल के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने बताया कि ठंडे मौसम में गेहूं की पौध में फुटाव अच्छा होता है और दिन में हल्की धूप मिलने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बेहतर ढंग से चलती है। इससे पौधों का विकास संतुलित रहता है और दानों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। डॉ. तिवारी का मानना है कि मौजूदा मौसम किसानों के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है और उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी की पूरी संभावना है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को इस समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह भी दी है। डॉ. तिवारी ने कहा कि फसल की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है और आवश्यकता अनुसार समय पर सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही यदि खेतों में दीमक या किसी अन्य कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो तुरंत अनुशंसित दवाओं का प्रयोग कर नुकसान से बचा जा सकता है।खेतों में काम कर रहे किसान भी इस मौसम को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। किसान कुलविंदर सिंह का कहना है कि ठंड और कोहरे से जहां आम लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं किसानों के लिए यह मौसम किसी वरदान से कम नहीं है। उनका मानना है कि अगर ठंड इसी तरह बनी रही तो गेहूं की फसल मजबूत होगी और पैदावार भी बेहतर मिलेगी।