Mandi, Dharamveer-:कांग्रेस के एक बड़े कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब प्रदेशाध्यक्ष की मौजूदगी में ही पार्टी के दो वरिष्ठ नेता खुले मंच पर आमने-सामने आ गए। निष्क्रिय कार्यकारिणी को लेकर की गई एक टिप्पणी ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया कि कार्यक्रम कुछ देर के लिए हंगामे में तब्दील हो गया।
पूरा घटनाक्रम पूर्व सीपीएस एवं सुंदरनगर के पूर्व विधायक सोहन लाल ठाकुर के संबोधन से शुरू हुआ। उन्होंने अपने भाषण में जिला कांग्रेस की पूर्व कार्यकारिणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक समय कार्यकारिणी में करीब 400 पदाधिकारी थे, लेकिन जब धरना-प्रदर्शन या किसी आंदोलन की बात आती थी तो मुश्किल से 40 लोग ही मौके पर दिखाई देते थे। उनका इशारा साफ तौर पर उन पदाधिकारियों की ओर था जो नाम मात्र के लिए पदों पर बने हुए थे और जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं थे।सोहन लाल ठाकुर की इस टिप्पणी को पूर्व मंत्री एवं पूर्व जिलाध्यक्ष प्रकाश चौधरी ने अपने ऊपर ले लिया। जैसे ही उन्हें मंच से बोलने का अवसर मिला, उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। प्रकाश चौधरी ने कहा कि कार्यकारिणी में लोगों को नेताओं की सिफारिश पर ही शामिल किया जाता है और यह प्रक्रिया आगे भी चलती रहेगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार को भी यही करना होगा।
प्रकाश चौधरी की तीखी प्रतिक्रिया के बाद पंडाल में माहौल गर्मा गया। कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ देर के लिए कार्यक्रम बाधित हो गया। नेताओं और आयोजकों ने किसी तरह कार्यकर्ताओं को शांत कराया। अपनी बात समाप्त करते हुए प्रकाश चौधरी ने कहा, “छेड़ा नी देणा,” यानी इस तरह के मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर नहीं उठाना चाहिए।इस पूरे विवाद के बीच पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर खुलकर सोहन लाल ठाकुर के समर्थन में आ गए। उन्होंने कहा कि सोहन लाल ठाकुर ने केवल निष्क्रिय पदाधिकारियों की बात की है और यह एक कड़वी सच्चाई है। कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि कई बार पदाधिकारियों की सूची सीधे शिमला से आती है और ऐसे लोगों को पद मिल जाते हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर कोई जानता तक नहीं। उन्होंने इस परंपरा को बंद करने की जरूरत बताई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार को भी मंच से हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और इसकी शुरुआत वे खुद से करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अब केवल सिफारिश के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर ही पदाधिकारी बनाए जाएंगे। जिनकी परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं होगी, उन्हें पद से हटाया जाएगा, चाहे वह जिलाध्यक्ष ही क्यों न हों।इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कांग्रेस के बड़े मंचों पर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ जाते हैं, जिससे पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।