गुरुग्राम। केंद्र सरकार के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद गुरुग्राम और मानेसर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। दोनों नगर निगम क्षेत्रों में घरों से निकलने वाला कूड़ा आज भी बिना छंटनी के सीधे लैंडफिल साइटों तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल डंपिंग स्थलों पर बोझ बढ़ रहा है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सरकार ने कचरे को चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी—में अलग-अलग रखने के आदेश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन बेहद कमजोर नजर आ रहा है। अधिकांश घरों से अब भी मिश्रित कूड़ा ही उठाया जा रहा है, जिससे कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम से प्रतिदिन लगभग 1200 टन और मानेसर से करीब 200 टन कचरा निकलता है। इसका बड़ा हिस्सा बिना सेग्रीगेशन के सीधे डंपिंग साइट पर डाल दिया जाता है। इससे लैंडफिल साइटों की क्षमता तेजी से खत्म हो रही है और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गीले कचरे को स्रोत पर ही अलग कर कंपोस्टिंग की जाए और सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाए, तो लैंडफिल तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इससे न केवल खर्च घटेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
मानेसर नगर निगम के कार्यकारी अभियंता निजेश कुमार ने बताया कि घरों में कूड़ा अलग-अलग रखना नागरिकों की जिम्मेदारी है। डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली एजेंसियों को नियमों का पालन सख्ती से कराने के निर्देश दिए गए हैं। शुरुआती तीन दिनों तक मिश्रित कूड़ा उठाया जाएगा, लेकिन इसके बाद भी नियमों का उल्लंघन होने पर नगर निगम कार्रवाई करेगा।
गौरतलब है कि बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर हर महीने करीब 60 हजार टन मिश्रित कचरा पहुंच रहा है और यहां पहले से ही लगभग 15 लाख टन कूड़ा जमा है। यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।