हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कॉलेज ऑफ बायो-टेक्नोलॉजी में पीएचडी छात्रा से छेड़छाड़ का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए छात्रा को न्याय दिलाने की मांग तेज कर दी है।
मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब मीडियाकर्मी कुलपति कार्यालय पहुंचे तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि कुलपति परिसर में मौजूद नहीं हैं। इसके बाद जब कॉलेज के डीन से मिलने की कोशिश की गई तो कॉलेज गेट पर ही प्रवेश रोक दिया गया।
कॉलेज प्रशासन ने मीडिया को रोकने के लिए तर्क दिया कि बाहर से आने वाले जूतों के कारण बैक्टीरिया अंदर जा सकते हैं। हालांकि पत्रकारों का कहना था कि वे लैब में नहीं, बल्कि कार्यालय में डीन से मुलाकात करना चाहते थे। इस दौरान पीड़िता से मिलने की भी अनुमति नहीं दी गई।
इस प्रकरण पर अब हरियाणा राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और स्टाफ को तथ्यों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय के कुलपति से जवाब-तलब किया जा सकता है।
कॉलेज के डीन प्रो. केडी शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी की एंट्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। उन्होंने बताया कि छात्रा की लिखित शिकायत के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने जांच समिति गठित कर जांच शुरू कर दी है।
वहीं छात्र नेता मनोज सिवाच ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में पहले भी छात्राओं ने कर्मचारियों के खिलाफ कई शिकायतें की थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो छात्र कुलपति कार्यालय के सामने धरना देंगे।
इस बीच विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पवन से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं आरोपित पक्ष से भी उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने भी कॉल नहीं उठाई।
विश्वविद्यालय से जुड़े पुराने मामलों की जांच भी अभी अधर में लटकी हुई है। भिवानी जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में दिवाली के दौरान हुए विवाद और छेड़छाड़ प्रकरण की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।