मंडी, धर्मवीर -:प्रदेश में 16 फरवरी से प्रस्तावित विधानसभा सत्र को लेकर सियासी हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार से सत्र की प्रकृति और एजेंडा स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब सत्र की तारीख घोषित कर दी गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह बजट सत्र होगा या किसी विशेष उद्देश्य से बुलाया गया सत्र।
जयराम ठाकुर ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार 16 फरवरी को सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी, परंतु उसके बाद की कार्यवाही को लेकर न तो विधायकों को सूचित किया गया है और न ही कोई आधिकारिक कार्यक्रम साझा किया गया है। उन्होंने कहा कि अब तक न तो विधायकों से प्रश्न मांगे गए हैं और न ही किसी प्रकार के नोटिस के लिए समय दिया गया है, जबकि नियमों के तहत प्रश्न और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए कम से कम 15 दिन का समय निर्धारित होता है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि पहले सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने के मुद्दे पर सत्र बुलाने की बात कर रही थी, जबकि इसी अवधि में बजट सत्र भी प्रस्तावित रहता है। ऐसे में राज्यपाल द्वारा सीधे बजट सत्र बुलाने की चर्चा सामने आई थी। बावजूद इसके, अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार बजट कब पेश करेगी और सत्र की अवधि कितनी होगी।उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सत्र औपचारिक रूप से शुरू कर बीच में स्थगित तो नहीं कर दिया जाएगा या फिर बिना बजट पेश किए ही समाप्त कर दिया जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि सत्र बुलाना सरकार का अधिकार है और विपक्ष को इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह सत्र की रूपरेखा, अवधि और कार्यसूची को लेकर स्थिति स्पष्ट करे, ताकि विधायक भी अपनी तैयारी कर सकें और जनता के मुद्दे सदन में प्रभावी ढंग से उठा सकें।