धर्मशाला | कांगड़ा जिले के आठ कॉलेज छात्रों के लिए “घर बैठे कमाई” का सपना बड़ी मुसीबत बन गया। मामूली कमाई के लालच में इन युवाओं ने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप दिए। बाद में इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आने पर ये सभी छात्र पुलिस की जांच के दायरे में आ गए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और टेलीग्राम के माध्यम से राजस्थान के एक संगठित साइबर गिरोह के संपर्क में आए थे। ठगों ने उन्हें एक आकर्षक निवेश योजना का झांसा देकर हर महीने 5 से 10 हजार रुपये कमाने का लालच दिया। इसके लिए उनसे नए बैंक खाते खुलवाने और उनकी पूरी बैंकिंग किट—पासबुक, एटीएम कार्ड और लिंक सिम—कूरियर के जरिए भेजने को कहा गया था।
खातों का नियंत्रण मिलते ही गिरोह ने इनका इस्तेमाल साइबर ठगी से कमाए गए पैसे को खपाने के लिए करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ। जब देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस ने इन खातों को ट्रैक किया और संबंधित मामलों में नोटिस छात्रों के घरों तक पहुंचे, तब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।
पुलिस नोटिस मिलने से घबराए छात्र धर्मशाला स्थित साइबर क्राइम पुलिस थाना पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी दी। साइबर पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है और उस गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है जिसने इन छात्रों को अपने जाल में फंसाया।
साइबर क्राइम डीआईजी रोहित मालपानी ने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि किसी भी अजनबी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम देना गंभीर अपराध है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी या दस्तावेज किसी अन्य को न दें।