Summer Express, नई दिल्ली | हवाई यात्रा के दौरान सामान के क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन ज्यादातर यात्रियों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता। बेंगलुरु के एक यात्री ने अपने खराब हुए बैग को लेकर एयरलाइन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उपभोक्ता आयोग से न्याय हासिल किया।
बेंगलुरु के ओल्ड एयरपोर्ट रोड निवासी सौरभ रपेरिया ने 8 सितंबर 2024 को दिल्ली से बेंगलुरु तक एयर इंडिया की फ्लाइट से यात्रा की थी। केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जब उन्होंने बैगेज बेल्ट से अपना बैग उठाया तो उस पर बड़ा डेंट लगा हुआ पाया।
उन्होंने तुरंत एयरलाइन के बैगेज सर्विस काउंटर पर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारियों ने शिकायत लेने या प्रॉपर्टी इर्रेगुलरिटी रिपोर्ट (PIR) जारी करने से मना कर दिया और उन्हें ईमेल के जरिए शिकायत भेजने को कहा। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस मामले को साझा किया।
इसके बाद एयरलाइन ने उनसे टिकट विवरण, बैगेज टैग नंबर और डैमेज कंप्लेंट नंबर मांगा। रपेरिया ने उपलब्ध जानकारी साझा की और बताया कि स्टाफ द्वारा शिकायत दर्ज करने से इनकार करने के कारण उन्हें कोई कंप्लेंट नंबर नहीं दिया गया था।
9 सितंबर 2024 को उन्होंने एयरलाइन को ईमेल भेजकर नुकसान की भरपाई की मांग की। एयरलाइन ने पहले 500 रुपये और बाद में 1,000 रुपये मुआवजे की पेशकश की, जिसे यात्री ने अपर्याप्त बताते हुए ठुकरा दिया। उन्होंने मांग की कि या तो बैग को उसी गुणवत्ता वाले नए बैग से बदला जाए या फिर 13,425 रुपये का मुआवजा दिया जाए।
मामला नहीं सुलझने पर उन्होंने 23 सितंबर 2024 को एयरलाइन को कानूनी नोटिस भेजा। जवाब नहीं मिलने पर 10 दिसंबर 2024 को उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने सेवा में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया।
हालांकि सभी दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करने के बाद उपभोक्ता आयोग ने माना कि एयरलाइन द्वारा मुआवजे की पेशकश यह स्वीकार करने के बराबर है कि बैग को नुकसान एयरलाइन की जिम्मेदारी के दौरान हुआ।
इसके बाद 17 फरवरी 2026 को आयोग ने एयर इंडिया को सौरभ रपेरिया को 7,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया।