Summer Express,नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने लुक आउट सर्कुलर जारी करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसे सभी वैधानिक निकाय जिनके पास आपराधिक क्षेत्राधिकार नहीं है, जैसे राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग , राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण और अन्य, सीधे ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से किसी व्यक्ति को देश छोड़ने से रोकने के लिए LOC नहीं मांग सकेंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी अनुरोध अब केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से ही भेजे जाएंगे। BoI को किसी भी अनधिकृत अनुरोध मिलने पर इसे तुरंत वापस करना होगा और संबंधित निकाय को सूचित करना होगा कि LOC जारी करने का अधिकार उनके पास नहीं है।
इस बदलाव का उद्देश्य LOC के दुरुपयोग को रोकना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है। पुराने नियमों में इन निकायों को LOC जारी करने के लिए सीधे BoI से अनुरोध करने की अनुमति थी, हालांकि अनुरोध के साथ पूरी जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी साझा करनी होती थी। अब सभी अनुरोध सीधे एजेंसियों के माध्यम से ही BoI तक जाएंगे।
गृह मंत्रालय ने LOC के फॉर्म में भी बदलाव किए हैं। अब इसमें तीन मानकीकृत विकल्प शामिल किए गए हैं: Detain & Inform Originator (रोकें और अनुरोधकर्ता को सूचित करें), Prevent Departure & Inform Originator (प्रस्थान रोकें और सूचित करें), और C Remarks for Action (टिप्पणियां देखें और कार्रवाई करें)। खुफिया एजेंसियां जैसे IB, RAW, CBI, NIA और राज्य ATS केवल ‘C Remarks’ का उपयोग काउंटर-टेररिज्म मामलों में कर सकती हैं।
कोर्ट के आदेशों को लेकर भी नई प्रक्रिया बनाई गई है। अगर कोई कोर्ट LOC हटाने, रद्द या निलंबित करने का आदेश देता है, तो इसे केवल ओरिजिनेटर एजेंसी के माध्यम से ही BoI तक पहुंचाया जाएगा। LOC वाले व्यक्ति की हिरासत के लिए भी समयसीमा तय की गई है। BoI को व्यक्ति की उपस्थिति का पता चलते ही तुरंत ओरिजिनेटर को सूचित करना होगा। यदि तीन घंटे में हिरासत नहीं ली जाती, तो व्यक्ति स्थानीय पुलिस के हवाले किया जाएगा, और ओरिजिनेटर को 24 घंटे के भीतर हिरासत सुनिश्चित करनी होगी।
यह नया नियम LOC की प्रक्रिया को मजबूत और नियंत्रित बनाने, दुरुपयोग रोकने और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।