ऊना, राकेश -:हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े मुद्दों को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। टोल टैक्स के विरोध के बाद अब संयुक्त पेंशनर्स संघ ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऊना में संयुक्त पेंशनर्स संघ ने सुक्खू सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए जोरदार नारेबाजी की और सरकार पर कर्मचारी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार पेंशनरों के हितों की अनदेखी कर रही है।उनका आरोप है कि पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई भत्ता (डीए) की 13 प्रतिशत किश्तें अब तक जारी नहीं की गई हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा घोषित 4 प्रतिशत डीए में से भी 1 प्रतिशत रोके जाने का आरोप लगाया गया। संघ का कहना है कि इस तरह के फैसले पेंशनरों और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं और इससे उनमें भारी नाराजगी है।संघ ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के एरियर का भुगतान बेहद धीमी गति से करने का प्रस्ताव दिया था। सरकार की ओर से एरियर को आधा प्रतिशत प्रति माह की दर से देने की बात कही गई थी, जिससे पूरा भुगतान होने में करीब 200 महीने यानी लगभग 16 साल 8 महीने लग जाते।
पेंशनर्स संघ ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।संयुक्त पेंशनर्स संघ ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। संघ का कहना है कि निगम में पेंशन देने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं है, जिसके कारण हर महीने अलग-अलग तिथियों पर पेंशन जारी की जाती है। इससे पेंशनरों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
संघ के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि HRTC के पास नई 400 बसें खरीदने के लिए तो धन उपलब्ध है, लेकिन पेंशन भुगतान के समय विभाग आर्थिक तंगी का हवाला देता है। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।संघ ने साफ कहा कि यदि आने वाले बजट में कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया, तो 30 मार्च को बड़ी संख्या में पेंशनर शिमला पहुंचकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगे।