Summer Express, फरीदाबाद | ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-80 में अधिग्रहित भूमि पर जारी कानूनी विवाद के बीच प्लॉटों की नीलामी करना हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को महंगा पड़ गया है। जमीन पर लंबे समय से अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद प्राधिकरण ने प्लॉटों की ई-नीलामी कर दी। नतीजतन, प्लॉट खरीदने वाले लोगों को तीन साल बाद भी कब्जा नहीं मिल पाया है, क्योंकि स्थानीय ग्रामीण लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।
इस मामले में पीड़ित खरीदारों ने हरियाणा राइट टू सर्विस आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायतकर्ता भावना गुप्ता और अमनदीप ने आयोग को बताया कि उन्होंने फरवरी 2023 में सेक्टर-80 में ई-नीलामी के जरिए प्लॉट खरीदे थे। दोनों ने प्लॉट की पूरी कीमत और सभी किस्तें जमा कर दीं, लेकिन अब तक उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिल सका।
जांच के दौरान सामने आया कि जिस जमीन पर प्लॉटों की नीलामी की गई थी, उस पर वर्ष 2009 से उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश (स्टे) लागू है। इसके बावजूद प्राधिकरण ने ई-नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर दी। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला न्यायालय की अवमानना और संभावित धोखाधड़ी की श्रेणी में आ सकता है। आयोग ने टिप्पणी की कि यदि किसी निजी कॉलोनाइजर ने बिना वैध स्वामित्व के प्लॉट बेचे होते, तो उसके खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाती।
दोनों मामलों में आयोग ने संबंधित अधिकारियों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि हर्जाने के रूप में शिकायतकर्ताओं को दी जाएगी। आयोग ने निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि अदा की जाए और 30 मार्च तक अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाए।
उधर, जिस जमीन पर प्लॉटिंग की गई है, वह बड़ौली और प्रह्लादपुर गांव की भूमि बताई जा रही है। इन गांवों के ग्रामीण अपनी जमीन वापस लेने की मांग को लेकर पिछले साढ़े तीन महीनों से सेक्टर-80 में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं।
घर बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक बीरपाल गुर्जर का कहना है कि जब तक उनकी जमीन वापस नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं दिया जाएगा।