Summer Express, विकास शर्मा , चिंतपूर्णी (ऊना) | चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर वीरवार को प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी के दरबार में दुर्गा अष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। मेले के आठवें दिन सुबह से ही श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर माता रानी के दर्शनों के लिए उमड़ पड़े और पूरा मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
इस विशेष अवसर पर प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए माता के गर्भगृह में नारियल की बलि दी गई। मान्यता है कि अष्टमी के दिन माता के चरणों में नारियल अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में भव्य हवन का आयोजन किया गया, जिसमें विधिवत मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां डालकर सुख-समृद्धि की कामना की गई। हवन के समापन पर पूर्णाहुति डाली गई और श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अष्टमी के पावन मौके पर माता चिंतपूर्णी को 56 प्रकार के व्यंजनों (छप्पन भोग) का अर्पण किया गया, जिनमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां, फल और मेवे शामिल रहे। माता रानी के दरबार को देश-विदेश के ताजे फूलों से बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्रद्धालु भी अपने साथ तरह-तरह के भोग, चुनरी और नारियल लेकर माता के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर और कई कनक-दंडवत करते हुए मां के द्वार पहुंचे।
मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध किए गए थे। अष्टमी होने के कारण क्षेत्र में कन्या पूजन का भी विशेष महत्व रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने छोटी कन्याओं को साक्षात देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारे और उन्हें हलवा-पूरी का प्रसाद खिलाकर दक्षिणा भेंट की। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस दिन मां चिंतपूर्णी के दरबार में हाजिरी लगाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।