Summer express,पानीपत | हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में पारदर्शिता के दावों के बीच पानीपत से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां दो परीक्षा केंद्रों पर पुलिसकर्मियों और टीचिंग स्टाफ द्वारा छात्रों को नकल कराने का खुलासा हुआ है। इस पूरे ‘चीटिंग स्कैंडल’ का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए दोनों केंद्रों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं।
जानकारी के अनुसार, विशेष रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात स्टाफ सुनियोजित तरीके से नकल कराने में शामिल था। फ्लाइंग टीम के आने पर सीसीटीवी कैमरे चालू कर दिए जाते थे, जबकि टीम के जाने के बाद रिकॉर्डिंग बंद कर दी जाती थी, ताकि नकल के सबूत रिकॉर्ड न हो सकें।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक हेड कॉन्स्टेबल और सेंटर सुपरिटेंडेंट मिलकर छात्रों तक नकल सामग्री (पर्चियां) पहुंचा रहे हैं। वहीं, एक महिला शिक्षक भी छात्रों की मदद करती नजर आई, जो पकड़े जाने के दौरान अपना चेहरा छिपाकर भागती दिखाई दी। इसके अलावा एक पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान परीक्षा हॉल में मोबाइल चलाते हुए भी पाया गया, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
पानीपत के डीसी विरेंद्र दहिया ने इस मामले को सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध बताया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि नकल में शामिल 32 छात्रों के खिलाफ अनफेयर मीन्स (UMC) के केस दर्ज किए गए हैं और आगे एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। साथ ही परीक्षा केंद्र पर तैनात पुलिस और टीचिंग स्टाफ के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।
डीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि डाहर समेत अन्य संदिग्ध केंद्रों की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं और इन्हें दोबारा आयोजित किया जाएगा।
हरियाणा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि 25 फरवरी और 12 मार्च को हुई परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच कराई जाएगी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रदेशभर में 10 विशेष रैपिड एक्शन फोर्स टीमें गठित की जाएंगी, जो परीक्षाओं पर कड़ी निगरानी रखेंगी।
गौरतलब है कि पिछले 15 दिनों में सोनीपत के बिधलान और चरखी दादरी के बाढ़ड़ा में भी इसी तरह के नकल के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।