Summer express,भिवानी। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को भिवानी पहुंचे। वे पूर्व सांसद जंगबीर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करने और उनके परिजनों से मिलकर सांत्वना देने आए थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की कृषि नीतियों तथा हाल ही में लागू किए गए फसल खरीद के नए नियमों पर तीखा प्रहार किया।
टिकैत ने कहा कि सरकार के कई फैसले व्यावहारिक नहीं हैं, जिनके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी भाईचारा प्रभावित हो रहा है और पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मंडियों में लागू किए जा रहे डिजिटल और बायोमैट्रिक सिस्टम की आलोचना की और इसे किसानों के लिए असुविधाजनक बताया।
उन्होंने तर्क दिया कि गांवों में अब भी कई जमीनें बुजुर्गों के नाम पर दर्ज हैं। ऐसे में फसल बेचने के लिए बुजुर्गों को मंडी लाकर अंगूठा लगवाना व्यवहारिक नहीं है। इसी तरह, यदि जमीन किसी महिला के नाम है तो भुगतान और पहचान प्रक्रिया में आने वाली जटिलताओं से परिवारों में विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। टिकैत ने मांग की कि पारंपरिक व्यवस्था को ही जारी रखा जाए, जिसमें किसान और व्यापारी आपसी समझ से कार्य करते थे।
ट्रैक्टरों से जुड़े नियमों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि एनजीटी के निर्देशों के चलते पुराने ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन और बीमा प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों के सामने संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नियम किसानों को अपराधी बनाने जैसे हैं और उनकी आजीविका पर सीधा असर डालते हैं।
इसके अलावा टिकैत ने आईएमटी और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर किसानों की जमीनों के कथित अधिग्रहण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन किसी भी हाल में न बेचें, क्योंकि जमीन ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
हाल की बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान पर उन्होंने कहा कि सरकार को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा देना चाहिए और गिरदावरी में खेत को इकाई मानकर आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नीतियों में बदलाव नहीं हुआ तो देशभर में बड़े आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।