Summer express, नई दिल्ली | दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कुवैत ने आरोप लगाया है कि गुरुवार को उसके क्षेत्र में ड्रोन हमले किए गए, जिनमें ईरान और उसके सहयोगी समूहों की भूमिका होने का दावा किया गया है। इसी बीच सऊदी अरब ने भी अपनी अहम तेल पाइपलाइन पर हालिया हमले में नुकसान की पुष्टि की है।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी KUNA के हवाले से बताया कि गुरुवार रात ड्रोन हमलों में देश की कुछ महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इस घटना ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की तैयारी चल रही है।
सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को नुकसान
सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक एक अज्ञात अधिकारी ने पुष्टि की है कि हालिया हमले में देश की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को क्षति पहुंची है। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को लाल सागर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है और होरमुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता को कम करती है।
इजरायल-लेबनान वार्ता की तैयारी
उधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ जल्द सीधे वार्ता की अनुमति देने की बात कही है। इसका उद्देश्य ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा समय में कोई युद्धविराम लागू नहीं है और सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
तनावपूर्ण हालात बने हुए
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल और लेबनान के बीच संभावित वार्ता अगले सप्ताह वाशिंगटन में शुरू हो सकती है, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और सीमा विवाद इसे जटिल बना रहे हैं। वहीं, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्धविराम की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि युद्धविराम स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय जीत को मजबूत करने का कदम” है। बावजूद इसके, क्षेत्र में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी समय तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।