Summer express/हमीरपुर,अरविंद-:हमीरपुर के एक निजी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता रज़ा मुराद ने अभिनय, सिनेमा और अपने अनुभवों को लेकर खुलकर बातचीत की। एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे इस अनुभवी कलाकार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अभिनय केवल संवाद बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक साधना है, जिसमें अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है।
उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं और हर भूमिका को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की है। उनके अनुसार, समय की पाबंदी और प्रोफेशनल रवैया किसी भी कलाकार की पहचान होते हैं और यही गुण उसे भीड़ से अलग बनाते हैं।सिनेमा के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए रज़ा मुराद ने कहा कि पहले फिल्मों में खलनायक का एक अलग ही प्रभाव और व्यक्तित्व हुआ करता था। जब विलेन स्क्रीन पर आता था, तो दर्शकों के मन में डर और रोमांच दोनों पैदा होते थे। लेकिन आज के दौर में यह फर्क काफी हद तक खत्म हो गया है। अब हीरो और हीरोइन भी ग्रे या नेगेटिव शेड्स वाले किरदार निभा रहे हैं, जिससे फिल्मों की कहानी और पात्रों की परिभाषा में बड़ा बदलाव आया है।
महिला कलाकारों के योगदान पर चर्चा करते हुए उन्होंने कंगना रनौत की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंगना ने बिना किसी गॉडफादर के अपने दम पर फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाई है और वह आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं।अंत में उन्होंने कहा कि सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ मेहनत और दृढ़ संकल्प बेहद जरूरी है। अगर किसी में आगे बढ़ने का जुनून हो, तो वह किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकता है।