Summer Express, हिसार | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल करीब 11 साल से अधिक समय जेल में बिताने के बाद हिसार सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। सफेद कुर्ता-पायजामा और ब्रांडेड जूते पहने रामपाल हल्की मुस्कान के साथ जेल से बाहर निकला, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
रिहाई के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, सीमित संख्या में मौजूद समर्थकों ने दूर से ही हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। जेल गेट पर तैनात संतरी ने भी रामपाल के बाहर आते ही प्रणाम किया।
रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रामपाल कुछ ही मिनटों में लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ सोनीपत स्थित अपने पैतृक गांव धनाना के लिए रवाना हो गया। काफिले में कई महंगी गाड़ियां शामिल थीं और हरियाणा पुलिस की एक गाड़ी एस्कॉर्ट के रूप में साथ चल रही थी।
इससे पहले दिन में अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई, जहां गवाहों के बयान दर्ज किए गए और अगली सुनवाई की तारीख 16 मई तय की गई। दोपहर बाद अदालत में जमानती बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद रिहाई के आदेश जेल प्रशासन को सौंपे गए।
रामपाल को 8 अप्रैल को हाईकोर्ट से देशद्रोह मामले में सशर्त जमानत मिली थी। उसके साथ बंद दो अन्य अनुयायियों के भी बेल बॉन्ड पूरे कराए गए।
परिजनों और समर्थकों ने रिहाई को लंबे समय बाद मिला न्याय बताते हुए खुशी जाहिर की। उनके अनुसार, रामपाल की वापसी अनुयायियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है और गांव धनाना में उनके स्वागत की तैयारियां पहले से की गई थीं।
गौरतलब है कि 2014 में बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस कार्रवाई के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद रामपाल को गिरफ्तार कर देशद्रोह समेत कई मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से अधिकांश में अदालत पहले ही राहत दे चुकी है।