Summer Express,सिरसा | हरियाणा में घग्गर नदी का बढ़ता प्रदूषण अब गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के अनुसार नदी का पानी अब पीने और सिंचाई के योग्य नहीं रह गया है, जिससे क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सिरसा जिले के मल्लेवाला गांव के निवासी सुरेश कुमार बताते हैं कि कभी घग्गर नदी का पानी बेहद साफ होता था और लोग इसमें मछलियां पकड़ते थे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनके अनुसार, नदी से तेज बदबू आती है और उसके पास जाना भी मुश्किल हो गया है। करीब 4,000 की आबादी वाला यह गांव आज स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले दस वर्षों में कैंसर से 25 से 30 लोगों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का मानना है कि घग्गर नदी का प्रदूषित पानी इस बीमारी का एक बड़ा कारण हो सकता है। लोगों का कहना है कि 2007 के बाद क्षेत्र में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई, जब नदी में प्रदूषण के स्पष्ट संकेत सामने आने लगे थे।
ग्रामीणों के अनुसार, कई परिवारों ने इस बीमारी के कारण अपने अपनों को खो दिया है या इलाज के लिए भारी आर्थिक बोझ झेला है। इलाज के लिए मरीजों को हिसार, चंडीगढ़, बठिंडा, जयपुर और बीकानेर जैसे शहरों तक जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ जाता है।
सुरेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार ने भी कैंसर के कारण गंभीर नुकसान झेला है, जहां इलाज के लिए जमीन तक बेचनी पड़ी। वहीं 38 वर्षीय गुरलाल सिंह ने बताया कि उन्होंने कुछ वर्षों में अपने पिता और दो चाचाओं को कैंसर से खो दिया, जिससे परिवार पर गहरा प्रभाव पड़ा।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कैंसर मामलों में किसी तेज वृद्धि से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मामले “रूटीन स्तर” पर हैं। अधिकारियों के अनुसार सरकारी और निजी अस्पतालों से डेटा एकत्र करने की प्रक्रिया में कई बार अंतर रह जाता है, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
वहीं विभिन्न रिपोर्टों और अध्ययनों में सिरसा और फतेहाबाद जैसे घग्गर बेल्ट क्षेत्रों में कैंसर के मामलों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिससे स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है। कुछ पुरानी रिपोर्टों में इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक मरीज दर्ज किए गए थे, जबकि हालिया सरकारी आंकड़े इससे कम संख्या दर्शाते हैं।
ग्रामीणों और विशेषज्ञों के बीच इस मुद्दे पर लगातार चर्चा जारी है। स्थानीय लोग घग्गर नदी के प्रदूषण को रोकने और क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।