Summer express/सिरसा , विजय -:हरियाणा के सिरसा जिले में एक वकील ने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठने और अपनी लॉ की डिग्री की प्रति मुख्यमंत्री के सामने जलाने की अनुमति मांगी है। इस संबंध में सिरसा बार एसोसिएशन के सदस्य एवं अधिवक्ता रणजीत सिंह भाम्भू ने उपायुक्त शांतनु शर्मा को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से अनुमति की मांग की।
अधिवक्ता रणजीत सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी खरीदी गई जमीन का इंतकाल जानबूझकर रोका जा रहा है और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा रिश्वत की मांग कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक वकील होकर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा, तो वे दूसरों को न्याय दिलाने का अधिकार कैसे रखते हैं। इसी कारण उन्होंने अपनी लॉ डिग्री को रखने का नैतिक अधिकार खत्म होने की बात कही और मुख्यमंत्री के समक्ष उसकी प्रति जलाने का निर्णय लिया है।रणजीत सिंह के अनुसार, उन्होंने अपने भाई राम सिंह, भाभी रोशनी और पत्नी के नाम दिसंबर 2025 में गांव जमाल में करीब 15 एकड़ 3 कनाल जमीन खरीदी थी। यह भूमि सोनीपत निवासी अनुसुइया से वसीका नंबर 3547 के तहत खरीदी गई थी। उनका कहना है कि यह अनुसुइया की खुदकाश्त भूमि थी, लेकिन लंबे समय तक जमीन का इंतकाल दर्ज नहीं किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे इंतकाल दर्ज करवाने के लिए हलका पटवारी सुरेश के पास पहुंचे तो उनसे 50 हजार रुपए और नायब तहसीलदार के नाम पर एक लाख रुपए की मांग की गई। रणजीत सिंह ने कहा कि रिश्वत देने से इनकार करने पर पटवारी ने उन्हें धमकी दी कि वह रिकॉर्ड में ऐसी टिप्पणी करेगा जिससे इंतकाल कराना मुश्किल हो जाएगा।वकील ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत चौपटा तहसीलदार से भी की, लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में मामला एसडीएम सिरसा के पास भेज दिया गया, जहां अभी भी सुनवाई लंबित है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि को गलत तरीके से “मुतनाजा” घोषित कर दिया गया।
रणजीत सिंह ने आरोप लगाया कि जमीन को लेकर अनुसुइया का एक भतीजा विवाद खड़ा कर रहा है और वह फर्जी तरीके से जमीन पर कब्जा करना चाहता है। जबकि अदालत पहले ही अनुसुइया के पक्ष में फैसला दे चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010-11 में चौपटा कोर्ट में तकसीम के दावे के तहत जमीन का बंटवारा भी हो चुका है, जिसके बाद अनुसुइया को अपनी हिस्सेदारी बेचने का पूरा अधिकार था।अब अधिवक्ता ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी है।