Summer express/कुरुक्षेत्र, गुरदीप सिंह गुजराल -: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सादगी और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए अहमदाबाद से दिल्ली और फिर दिल्ली से कुरुक्षेत्र तक रेल यात्रा की। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद उन्होंने गुरुकुल तक का सफर साइकिल से तय किया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और सादा जीवन अपनाने का संदेश दिया।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक परिस्थितियां चिंताजनक बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच बढ़ते विवाद का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्टेट ऑफ हार्मुज प्रभावित होने के कारण भारत के तेल आयात पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ईंधन की बचत करे और अनावश्यक तेल खपत को कम करने में सहयोग दे।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार देश को आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। यदि देशवासी स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएं और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करें, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी संभव हो सकेगी।राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह संकल्प लिया है कि जब तक तेल संकट सामान्य नहीं हो जाता, तब तक वे हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर का उपयोग नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी अधिकांश यात्राएं अब रेल, बस और साइकिल के माध्यम से ही होंगी। साथ ही वे तीन से अधिक वाहनों के काफिले का प्रयोग भी नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र की यह यात्रा भी पूरी तरह रेल मार्ग से की गई है और वापसी भी ट्रेन से ही होगी।उन्होंने कहा कि गुजरात के गांवों के दौरे के दौरान वे सरकारी स्कूलों में रात्रि विश्राम करते हैं तथा अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों के साथ भोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी सप्ताह में एक दिन निजी वाहनों का उपयोग न करने और साइकिल व सार्वजनिक परिवहन अपनाने का आग्रह किया है।राज्यपाल ने कहा कि यदि सभी नागरिक मिलकर ईंधन बचत, स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करें, तो देश जल्द ही हर संकट का मजबूती से सामना कर सकेगा।