Summer express, लेह, लद्दाख। लद्दाख के तांगत्से क्षेत्र के पास भारतीय सेना का चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हेलीकॉप्टर में त्रिशूल डिवीज़न के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) समेत तीन सैन्य अधिकारी सवार थे। राहत की बात यह रही कि हादसे में सभी अधिकारी सुरक्षित रहे और उन्हें केवल हल्की चोटें आईं। हेलीकॉप्टर को लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के अधिकारियों द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था।
जांच के आदेश, संभावित कारणों की तलाश
सेना ने दुर्घटना की वजह जानने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (CoI) की स्थापना कर दी है। शुरुआती अनुमान में तकनीकी खराबी और कठिन मौसम को संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि केवल जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
पुराने हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने सेना के पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। दशकों से सेवा में मौजूद ये मशीनें अब उम्रदराज हो चुकी हैं और कठिन पर्वतीय इलाकों में इनके संचालन में चुनौतियां आती हैं। भारतीय सेना इन्हें चरणबद्ध तरीके से आधुनिक Light Utility Helicopter (LUH) से बदलने की योजना बना रही है।
चीता हेलीकॉप्टर का विशेष योगदान
चीता हेलीकॉप्टर को 1971 में सेना में शामिल किया गया था। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह बेहतर प्रदर्शन के कारण लंबे समय तक सेना की भरोसेमंद मशीनों में रहा। इसका उपयोग सैनिकों तक रसद पहुंचाने, टोही मिशनों, तोपखाने की निगरानी, मेडिकल इवैक्यूएशन और आपातकालीन एयर एम्बुलेंस सेवाओं के लिए होता रहा है। सियाचिन और अन्य दुर्गम इलाकों में इसकी भूमिका अहम रही है।
ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान का जोखिम
18,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उड़ान भरना किसी भी हेलीकॉप्टर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। पतली हवा की वजह से इंजन की ताकत और रोटर की लिफ्ट प्रभावित होती है। फिर भी सेना बाना टॉप, अशोक और सोनम जैसी ऊंचाई वाली चौकियों तक आवश्यक सामान पहुंचाने के लिए चीता हेलीकॉप्टर पर निर्भर रहती है।
LUH बनेगा नई ताकत
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित Light Utility Helicopter (LUH) खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें Shakti-1U टर्बोशाफ्ट इंजन लगाया गया है जो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करता है। यह हेलीकॉप्टर 21,300 फीट तक उड़ान भर सकता है और दुनिया के सबसे ऊंचे हेलीपैड्स पर उतरने की क्षमता रखता है। LUH में डिजिटल ग्लास कॉकपिट, नाइट विज़न सपोर्ट और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं।
तीन टन क्षमता वाले इस हेलीकॉप्टर में दो क्रू सदस्य और छह सैनिक सवार हो सकते हैं। इसकी अधिकतम गति लगभग 235 किलोमीटर प्रति घंटे है।
इस दुर्घटना ने भारतीय सेना के पुराने हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा और भविष्य में आधुनिक LUH हेलीकॉप्टरों की जरूरत पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।