Summer express, रेवाड़ी। बावल औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-5 स्थित जीएलएस फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लापता दो श्रमिकों के कंकाल मिलने से परिवारों की उम्मीदें टूट गईं, लेकिन अब उनकी पहचान डीएनए रिपोर्ट के इंतजार में अटकी हुई है। हादसे के सात दिन बाद भी डीएनए मिलान की रिपोर्ट नहीं आने से परिजन अपनों के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए बेचैन हैं।
मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए 25 मई को परिजनों के डीएनए सैंपल लेकर करनाल के मधुबन स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजे गए थे। अधिकारियों को उम्मीद थी कि रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर मिल जाएगी, लेकिन अभी तक परिणाम नहीं आने से प्रक्रिया लंबित है। रिपोर्ट आने के बाद ही कंकालों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी और शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
इस बीच मृतकों के परिवार लगातार अस्पताल और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अनिश्चितता की स्थिति ने उनकी पीड़ा और बढ़ा दी है। हादसे के बाद से परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे जल्द से जल्द पहचान की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
उधर, बावल थाना पुलिस ने पीड़ित परिवारों की शिकायत पर फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जा रहा है और डीएनए रिपोर्ट मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि 19 मई को इंक निर्माण करने वाली जीएलएस फैक्ट्री में अचानक तेज धमाकों के साथ भीषण आग लग गई थी। आग की चपेट में आने से छह श्रमिक झुलस गए थे। इनमें हरीबाबू और प्रवेश गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान हरीबाबू की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
हादसे के छह दिन बाद फैक्ट्री परिसर से बिहार के शेखपुरा जिले के केबलबीघा निवासी 26 वर्षीय धर्मेंद्र और नालंदा जिले के मैथी गांव निवासी करीब 50 वर्षीय सतेंद्र पासवान के कंकाल बरामद हुए थे। पहचान संभव नहीं होने के कारण उनके अवशेषों को नागरिक अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखा गया है।
बावल थाना प्रभारी फूल कुमार ने बताया कि दोनों शवों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परिजनों के सैंपल मधुबन लैब भेजे गए हैं। विभाग प्रयास कर रहा है कि डीएनए रिपोर्ट जल्द प्राप्त हो, ताकि मृतकों की पहचान कर उनके शव सम्मानपूर्वक परिजनों को सौंपे जा सकें।