एजेंसी। लंदन
ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय के आधिकारिक विवरण में बड़ा बदलाव किया गया है। ब्रिटिश शाही परिवार की वार्षिक सॉवरेन ग्रांट रिपोर्ट 2025-26 में सदियों पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ उपाधि का उल्लेख हटाकर नई शब्दावली अपनाई गई है।
अब आधिकारिक विवरण में कहा गया है कि सम्राट इंग्लैंड के चर्च के सुप्रीम गवर्नर हैं और ब्रिटेन जैसे बहुधार्मिक (मल्टी-फेथ) समाज में सभी आस्थाओं के लिए स्थान और संरक्षण सुनिश्चित करते हैं।
‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है। वर्ष 1521 में पोप लियो दशम ने तत्कालीन ब्रिटिश सम्राट हेनरी अष्टम को यह सम्मान प्रदान किया था। बाद में यह ब्रिटिश राजशाही की आधिकारिक परंपरा का हिस्सा बन गया और तब से हर सम्राट के औपचारिक परिचय में शामिल रहा।
हालांकि, यह बदलाव संवैधानिक भूमिका में परिवर्तन नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, किंग चार्ल्स अब भी चर्च ऑफ इंग्लैंड के सुप्रीम गवर्नर हैं और उनकी कानूनी तथा धार्मिक जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बदलाव केवल आधिकारिक विवरण की भाषा में किया गया है, जिससे आधुनिक और बहुधार्मिक ब्रिटेन की छवि को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाया जा सके।
यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि किंग चार्ल्स ने 1994 में प्रिंस ऑफ वेल्स रहते हुए कहा था कि वह स्वयं को केवल एक धर्म का नहीं, बल्कि सभी धर्मों का संरक्षक मानना पसंद करेंगे।
मौजूदा संशोधन को उसी सोच का विस्तार माना जा रहा है। हालांकि, इस बदलाव को लेकर ब्रिटेन में राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर बहस भी तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे बदलते सामाजिक परिवेश के अनुरूप कदम बताया है, जबकि अन्य इसे ऐतिहासिक परंपरा से दूरी के रूप में देख रहे हैं।