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सेना की वर्दी में बड़ा बदलाव, औपनिवेशिक दौर की कई परंपराओं को किया गया खत्म

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी वर्दी, औपचारिक पोशाक और समारोहों से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए औपनिवेशिक दौर की कई परंपराओं को समाप्त करने का फैसला किया है। सेना ने ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ नाम से नया ड्रेस कोड जारी किया है, जो करीब आठ वर्ष बाद किया गया सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है। सेना का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य भारतीय पहचान, आधुनिक जरूरतों और व्यावहारिकता के अनुरूप ड्रेस नियमों को ढालना है, जबकि सैन्य अनुशासन और रेजिमेंटल परंपराओं को बरकरार रखा जाएगा।
नई नियमावली के तहत औपनिवेशिक विरासत से जुड़े कई प्रतीकों और प्रथाओं को हटाया गया है। अब परेड के दौरान रिव्यूइंग ऑफिसर (मुख्य अतिथि) के लिए तलवार धारण करना अनिवार्य नहीं होगा। तलवार केवल परेड कमांडर और कुछ विशेष सैन्य समारोहों तक सीमित रहेगी। इसके अलावा, लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे कुछ औपचारिक बेल्ट और अन्य सजावटी सैन्य उपकरण भी चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे। सेना ने पुराने ब्रिटिश दौर के शब्द ‘रॉयल’ का उपयोग भी समाप्त करने का निर्णय लिया है।
नई ड्रेस पॉलिसी में भारतीय परंपरा को बढ़ावा देते हुए अधिकारियों के औपचारिक नागरिक परिधान में बंडी जैकेट को शामिल किया गया है। साथ ही मौसम और परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नया बैटल जैकेट भी लाया जा रहा है, जो वर्तमान सर्दियों की जर्सी की जगह लेगा। सेना का मानना है कि नई वर्दी भारतीय जलवायु के अधिक अनुकूल होने के साथ-साथ जवानों के लिए अधिक सुविधाजनक और कार्यक्षम होगी।
{विस्तृत दिशा-निर्देश जारी: नई नियमावली में व्यक्तिगत साज-सज्जा (ग्रूमिंग) से जुड़े मानकों को भी स्पष्ट किया गया है। पुरुष और महिला सैनिकों के लिए हेयरस्टाइल, टैटू, आभूषण और अन्य व्यक्तिगत पहनावे के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि पूरी सेना में एकरूपता बनी रहे। महिला अधिकारियों को कुछ औपचारिक अवसरों पर सादे रंग की साड़ी या निर्धारित भारतीय परिधान पहनने की अनुमति भी दी गई है। सेना अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव केवल वर्दी बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सैन्य परंपराओं को स्वतंत्र भारत की पहचान के अनुरूप विकसित करने की व्यापक पहल का हिस्सा है। हाल के वर्षों में सेना ने कई अन्य सुधार भी किए हैं, जिनमें स्वदेशी उपकरणों को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग और सैन्य प्रक्रियाओं का सरलीकरण शामिल है।
{सेना की पेशेवर छवि और मजबूत होगी: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई ड्रेस पॉलिसी से भारतीय सेना की पेशेवर छवि और मजबूत होगी। उनके अनुसार, औपनिवेशिक दौर के प्रतीकों को हटाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। हालांकि सैन्य मूल्यों, अनुशासन और रेजिमेंटल गौरव में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नई वर्दी और नियम भारतीय सेना की बदलती पहचान को दर्शाते हैं।

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