Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल धर्मशाला में बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडा मौसम और पहाड़ी वातावरण का आनंद लेने आने वाले पर्यटकों को शहर की बदहाल सड़कें और अधूरा आधारभूत ढांचा निराश कर रहा है। जगह-जगह बने गड्ढे, भूस्खलन से प्रभावित मार्ग और धीमी गति से चल रहे मरम्मत कार्य लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। इन मुद्दों को लेकर धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सुधीर शर्मा ने कहा कि यदि सरकार धर्मशाला को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखती है तो सबसे पहले मजबूत और टिकाऊ आधारभूत ढांचे पर ध्यान देना होगा। उनका कहना था कि सड़कों के गड्ढों में केवल मिट्टी भर देना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बरसात के दौरान मिट्टी बह जाती है और सड़कें दोबारा खराब हो जाती हैं। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और दीर्घकालिक सड़क मरम्मत कार्य करवाने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुई कई सड़कें अब तक पूरी तरह से बहाल नहीं हो सकी हैं। मैक्लोडगंज मार्ग सहित कई क्षेत्रों में मलबा हटाने और सड़क सुधार का कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है। उनका कहना था कि सुरक्षित और सुगम सड़क नेटवर्क के बिना पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे व्यावहारिक नहीं हो सकते।विधायक ने प्रदेश में आपदा से जुड़े सरकारी संदेशों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही रहती हैं, लेकिन पूरे प्रदेश को आपदा प्रभावित बताने वाले बयानों से पर्यटन उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार को तथ्यों के आधार पर संतुलित और जिम्मेदार तरीके से जानकारी साझा करनी चाहिए, ताकि पर्यटकों में अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
सुधीर शर्मा ने धर्मशाला के लिए आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि बरसाती पानी की समुचित निकासी, नालों के नियमित रखरखाव और वैज्ञानिक योजना के अभाव में हर वर्ष कटाव और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि शहर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की दिशा में प्रयास जारी हैं, जिससे भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।