Summer express/शिमला/संजू-:शिमला में न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम को लेकर राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ाने का ऐलान किया है। संघ का कहना है कि यदि 5 सितंबर तक सरकार इस व्यवस्था को वापस लेने का निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने पत्रकार वार्ता में कहा कि प्राथमिक शिक्षकों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि इस व्यवस्था का सबसे अधिक असर प्राथमिक स्कूलों और वहां पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने बताया कि न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के विरोध में शुरू किया गया आंदोलन लगातार जारी है और जब तक इस व्यवस्था को वापस नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई को प्राथमिक शिक्षकों की पदयात्रा शिमला पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में बैठक हुई थी। बैठक में यह तय किया गया था कि प्राथमिक शिक्षक संघ और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित कर मांगों पर विस्तार से विचार किया जाएगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के गठन में अनावश्यक देरी की गई। इसके बाद 5 अगस्त को हुई बैठक में ऐसे कई संगठनों को भी शामिल किया गया, जिनका न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम से सीधा संबंध नहीं है। उनका कहना था कि प्राथमिक शिक्षक इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, इसलिए उनकी राय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।रमेश शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग को उम्मीद थी कि अन्य शिक्षक संगठन इस व्यवस्था का समर्थन करेंगे, लेकिन बैठक में अधिकांश संगठनों ने इसका विरोध किया। उन्होंने बताया कि टीजीटी, सी एंड वी, साइंस मास्टर, टीजीटी आर्ट्स, स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ सहित कई संगठनों ने न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम पर आपत्ति जताई और इसे व्यवहारिक नहीं बताया।उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिक स्कूलों में खाली पड़े पदों को नियमित भर्ती से भरने के बजाय प्रतिनियुक्ति के जरिए व्यवस्था चलाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका असर आगे चलकर माध्यमिक शिक्षा पर भी दिखाई देगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में कुछ अधिकारियों और प्रिंसिपलों के माध्यम से इस व्यवस्था के समर्थन में माहौल बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के अधिकांश फील्ड स्तर के प्रिंसिपल भी न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि केवल विभागीय रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेने के बजाय जमीनी हालात का भी आकलन किया जाए। उनका कहना था कि वास्तविक स्थिति को समझे बिना लिया गया फैसला शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।रमेश शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ का क्रमिक अनशन पहले की तरह जारी रहेगा। यदि 5 सितंबर तक सरकार ने न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम को वापस लेने का निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन का अगला चरण पहले से अधिक व्यापक और निर्णायक होगा। उन्होंने कहा कि इस बार शिक्षक केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे और लिखित तथा स्पष्ट निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।उन्होंने पदयात्रा और आंदोलन को मिले जनसमर्थन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार हजारों प्राथमिक शिक्षक, सेवानिवृत्त शिक्षक, जेबीटी बेरोजगार, एसएमसी सदस्य, मल्टी टास्क वर्कर, पंचायत प्रतिनिधि और आम लोग इस आंदोलन के साथ खड़े हैं। चौड़ा मैदान में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा अब केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्राथमिक शिक्षा से जुड़े व्यापक जनहित का विषय बन चुका है।रमेश शर्मा ने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक सरकार ने सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशभर में और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।