Summer express/शिमला, संजू-:राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में तिब्बती भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और विशिष्ट पहचान के संरक्षण की मांग को लेकर तिब्बती समुदाय ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। रीजनल तिब्बतन वीमेन एसोसिएशन और रीजनल तिब्बतन कम्युनिटी शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 50 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और 24 घंटे का अनशन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने बाल मुंडवाकर प्रतीकात्मक विरोध जताया। कार्यक्रम में समाजसेवी एवं भाजपा नेता कर्ण नंदा भी पहुंचे।
इस दौरान कर्ण नंदा ने कहा कि भारत और तिब्बती समुदाय का संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा है। हिमाचल प्रदेश का तिब्बती समुदाय के साथ दशकों पुराना विशेष संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की भाषा, संस्कृति, धर्म और पहचान उसकी महत्वपूर्ण विरासत होती है और उसका संरक्षण जरूरी है।
नंदा ने कहा कि तिब्बती समुदाय जिस शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ी चिंताओं को सामने रख रहा है, उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति शांति, करुणा, सह-अस्तित्व, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा की पक्षधर रही है। उन्होंने लोबगा रंगजेन की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शांति की कामना की।वहीं इस मौके पर तिब्बती मूल की महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका यह प्रदर्शन तिब्बती भाषा, संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता और पहचान को सुरक्षित रखने की भावना से किया जा रहा है।