Summer express/हमीरपुर, अरविंद-: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर ऑर्फन एंड विडो सेस (अनाथ एवं विधवा सेस) लगाए जाने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश सरकार की ओर से मंगलवार, 11 अगस्त को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी। अधिसूचना के अनुसार मंगलवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल पर यह अतिरिक्त सेस लागू हो गया। सरकार के इस फैसले को लेकर हमीरपुर के स्थानीय लोगों और युवाओं में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ता है।
हमीरपुर निवासी विजय वर्मा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाने से महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में परिस्थितियों में सुधार के बाद ईंधन की कीमतों में राहत मिलेगी। ऐसे में सरकार की ओर से नया सेस लगाए जाने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सेस को वापस लिया जाए या कम से कम इसमें राहत दी जाए, ताकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो सकें।स्थानीय निवासी विशाल राणा ने कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल पहले से ही महंगे हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का लाभ उपभोक्ताओं को भी मिलना चाहिए। विशाल ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पेट्रोल-डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने की मांग की। उनका कहना है कि इससे ईंधन की कीमतों को लेकर आम लोगों को राहत मिल सकती है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए नए सेस को जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।स्थानीय युवा दीपक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद लोगों को उम्मीद थी कि हालात सामान्य होने पर पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा। लेकिन अब अतिरिक्त सेस लगाए जाने से लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और सेस वापस लेने की मांग की।
वहीं शिव कुमार ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर बाजार में पहुंचने वाली वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को आम जनता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सेस लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
स्थानीय युवा अमन ने भी सरकार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि ईंधन सस्ता होने से आम लोगों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा और परिवहन खर्च कम होने से महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि 60 पैसे प्रति लीटर का सेस भले ही छोटी राशि दिखाई देता हो, लेकिन रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों पर इसका लगातार आर्थिक असर पड़ेगा। लोगों ने सरकार से मांग की है कि ऑर्फन एंड विडो सेस को वापस लिया जाए और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आम जनता को राहत दी जाए।