रूस | अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को रूस ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया। क्रेमलिन ने स्पष्ट कर दिया कि अब वह मध्यम और कम दूरी की मिसाइलों (INF मिसाइलों) की तैनाती पर खुद पर लगाए गए स्वैच्छिक प्रतिबंध को खत्म कर रहा है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका ने दो परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां रूस की समुद्री सीमा के करीब तैनात कर दी हैं। माना जा रहा है कि यह फैसला वैश्विक सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है और एक नई मिसाइल रेस की शुरुआत कर सकता है।
INF संधि अब इतिहास बन चुकी!
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) संधि जैसी कोई बाध्यता नहीं रही, इसलिए रूस खुद को प्रतिबंधित नहीं रखेगा।
इसका मतलब साफ है — अब रूस यूरोप, एशिया या किसी भी रणनीतिक क्षेत्र में 500 से 5,500 किमी रेंज की मिसाइलें तैनात कर सकता है।
नाटो और अमेरिका की चिंता बढ़ी
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम अमेरिका और नाटो को भी मजबूर करेगा कि वे नई तैनातियों पर विचार करें। इससे वैश्विक शक्ति संतुलन, खासकर एशिया और यूरोप में, बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
क्या है INF संधि?
1987 में अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हुई INF संधि के तहत ज़मीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की एक सीमित रेंज (500–5,500 किमी) पर रोक लगाई गई थी। लेकिन अमेरिका ने 2019 में इस संधि से खुद को अलग कर लिया था।
ट्रंप का आदेश और रूस की प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की सीमा के पास दो परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती का आदेश दिया था। इसके जवाब में रूस ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए INF मिसाइलों पर लगा स्वैच्छिक बैन खत्म कर दिया।
संभावित असर:
- यूरोप और एशिया में मिसाइल तैनातियों की नई होड़
- अमेरिका और रूस के बीच तनाव नई ऊंचाई पर
- वैश्विक सुरक्षा और रणनीति समीकरणों में बड़ा उलटफेर संभव