पेरिस | यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी को लेकर बृहस्पतिवार को पेरिस में आयोजित बैठक में यूरोपीय देश असमंजस की स्थिति में दिखे। युद्ध जारी है और फिलहाल किसी भी प्रकार के स्थायी संघर्ष विराम का संकेत नहीं है। बैठक में यूक्रेन की सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका और भविष्य की रणनीति पर भी कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा सका।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि युद्ध रुकने के बाद यदि रूस फिर से आक्रमण करता है तो उससे सैन्य रूप से कैसे निपटा जाएगा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जोर दिया कि यूक्रेन को यूरोप की ओर से मिलने वाले सैन्य आश्वासन के लिए अमेरिका का समर्थन जरूरी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केवल संकेत दिए हैं और उनका रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने न तो युद्ध विराम की अपील की है और न ही रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए हैं।
बैठक में यूरोपीय देशों ने अपनी तैयारियों का भी खाका पेश किया। ब्रिटेन, फ्रांस और एस्टोनिया ने कहा कि वे रूस के संभावित आक्रमण को रोकने के लिए यूक्रेन में सेना तैनात करने के लिए तैयार हैं, जबकि पोलैंड ने इसे अस्वीकार करते हुए यूरोप के पूर्वी हिस्से में नाटो सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। मार्च में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने यूरोपीय सहयोगियों को बताया था कि यूक्रेन की सुरक्षा के लिए कम से कम 10,000 सैनिकों की आवश्यकता होगी। सैनिकों की रोटेशन और विश्राम को ध्यान में रखते हुए लगभग 30,000 सैनिकों की तैनाती पर भी विचार हो रहा है।