जबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दूसरे दिन विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में स्वयंसेवकों की भागीदारी को लेकर गहन चर्चा हुई। बैठक में स्वयंसेवकों से राष्ट्रहित से जुड़े अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया, ताकि देश में घुसपैठियों की पहचान उजागर की जा सके। संघ ने विशेष रूप से रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर चिंता व्यक्त की।
बैठक के तीन सत्रों में जनसंख्या असंतुलन, गो हत्या, और पंच परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
संघ ने स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन का उद्देश्य एक मजबूत राष्ट्र और एकजुट समाज का निर्माण करना है। इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाने की दिशा तय की गई है।
स्वदेशी को बढ़ावा और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर
बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर वक्तव्य जारी किए।
संघ ने पंच परिवर्तन के “स्व-भाव जागरण” आयाम के तहत स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। प्रस्ताव में तय हुआ कि जनता को स्वदेशी वस्तुओं से जोड़ा जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और “देश का पैसा देश में रहे” की भावना साकार हो सके।
पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम
- सामाजिक समरसता: मंदिर, श्मशान और जलस्रोत जैसे सार्वजनिक स्थान सभी के लिए समान हों। जातिगत भेदभाव मिटाकर समाज को एक परिवार के रूप में जोड़ना लक्ष्य है।
- कुटुंब प्रबोधन: परिवारों में मूल्य आधारित जीवन, आपसी संवाद और सम्मान को बढ़ावा देना ताकि अगली पीढ़ी को अच्छे संस्कार मिलें।
- पर्यावरण संरक्षण: पौधारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक के सीमित उपयोग के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना।
- स्व-भाव जागरण: आत्मनिर्भरता और भारतीय संस्कृति पर गर्व का भाव जगाना; विदेशी उत्पादों की बजाय स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना।
- नागरिक कर्तव्य: कर भुगतान, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और स्वच्छता जैसे दायित्वों के पालन पर जोर देना।