गुजरात | गुजरात एंटी-टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) ने सोमवार को आईएसआईएस से जुड़े होने के संदेह में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी में शामिल प्रमुख व्यक्ति डॉ. अहमद मोहियुद्दीन सैय्यद (35) पर आरोप है कि वह बेहद जहरिला रसायन रिसिन तैयार कर उसे हथियारबंद करने की योजना बना रहा था। ATS के मुताबिक पकड़े गए अन्य दो आरोपी उत्तर प्रदेश के निवासी आज़ाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम हैं।
कठोर सर्वे और निशाना बनाने की योजना
एटीएस ने बताया कि सैय्यद ने पिछले छह महीनों में दिल्ली, अहमदाबाद और लखनऊ के व्यस्त बाजारों तथा कुछ संवेदनशील स्थानों का बारीकी से सर्वे किया। सूचीबद्ध स्थलों में दिल्ली का आज़ादपुर मंडी, अहमदाबाद का नारोड़ा फल बाजार और लखनऊ का कुछ कार्यालय/स्थान शामिल रहे — जिनका चुनाव भीड़ और सार्वजनिक गतिविधियों के आधार पर किया गया था। अधिकारीयों का कहना है कि ये इलाके संभावित निशाने के तौर पर चुने जा रहे थे।
रिसिन बनाने की तैयारी और बरामद सामग्री
ATS ने बताया कि सैय्यद रिसिन—जो कैस्टर प्लांट के बीजों से प्राप्त होने वाला अत्यंत जहरीला प्रोटीन है—को हथियारबद्ध करने की प्रक्रिया में था। उसके पास रासायनिक कच्चा माल, उपकरण और प्रारंभिक रासायनिक प्रयोग के प्रमाण मिले हैं। जांचकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने प्रयोगशाला सेट-अप के कुछ सुराग और संदिग्ध सामग्री बरामद की है, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।
नेटवर्क और कनेक्शन की जांच
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी संकेत मिला है कि गिरफ्तार आरोपियों का संबंध किसी बड़े ISIS-लिंक्ड नेटवर्क से हो सकता है और वे स्लीपर-सेल गतिविधियों में शामिल थे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सैय्यद का संपर्क ISKP (ISIS की क्षेत्रीय शाखा) के कथित संपर्कों से था और वह कट्टरवादी विचारधारा के प्रभाव में दिखा। ATS के डीआईजी ने बताया कि आरोपियों द्वारा फंड इकट्ठा करने, लोगों को भर्ती करने और व्यापक आतंकी गतिविधियाँ रचने की योजनाएं थीं; जांच इन पहुलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
रिसिन क्या है — क्या खतरा है?
रिसिन कैस्टर बीजों से निकाला जाने वाला एक प्रोटीन है जो बहुत कम मात्रा में भी घातक साबित हो सकता है। आम तौर पर रिसिन विषाक्तता दुर्लभ होती है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका उपयोग खतरे का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर चिकित्सीय सहायता मिलने पर कुछ मामलों में बचाव संभव है, पर रोकथाम और त्वरित पहचान बेहद जरूरी है।
आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद ATS ने राज्य और केंद्र की अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। गिरफ्तार आरोपियों की उपस्थिति में रिमांड और विस्तृत पूछताछ जारी है तथा बरामद सामग्री की वैज्ञानिक जाँच और ट्रैवल-रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन व संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।