आयोग ने रबी सीजन के लिए एक्शन प्लान मांगा
Haryana, 7 December-:हरियाणा सरकार अब धान की पराली के साथ-साथ गेहूं के फसल अवशेष जलाने पर भी कठोर रुख अपनाने जा रही है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने राज्य के मुख्य सचिव से आगामी रबी सीजन के लिए विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें निगरानी व्यवस्था, दंडात्मक कार्रवाई और व्यापक जागरूकता अभियान शामिल होंगे। सरकार जल्द ही यह प्लान आयोग को सौंपेगी।
राज्य में कई किसान गेहूं की कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों को खेतों में ही जलाकर निपटारा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं के अवशेष जलाने से भी वही खतरनाक प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं जो धान की पराली से निकलते हैं। इसमें पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, मीथेन और बैंजीन जैसी जहरीली गैसें शामिल हैं। ये गैसें न केवल वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव डालती हैं। लगातार जलाने से मिट्टी के महत्वपूर्ण पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता घटती है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 अप्रैल से 31 मई तक हरियाणा में गेहूं अवशेष जलाने के 1832 मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा पिछले चार वर्षों में सबसे कम है। वर्ष 2022 में 2887, 2023 में 1903 और 2024 में 3159 मामले सामने आए थे। वर्ष 2025 के जिला-वार आंकड़ों की बात करें तो फतेहाबाद में 220, सोनीपत में 219, कैथल में 178, जींद में 176 और करनाल में 164 मामले दर्ज हुए।
अन्य राज्यों की तुलना में भी हरियाणा की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। मध्य प्रदेश में 34,429, उत्तर प्रदेश में 14,398, पंजाब में 10,207 और दिल्ली में 49 मामलों की पुष्टि हुई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके और किसानों को वैकल्पिक प्रबंधन तरीकों के लिए प्रेरित किया जा सके।