चंडीगढ़। हरियाणा में नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर जारी असमंजस और खींचतान के बीच सोमवार को UPSC ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पैनल को खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले के अनुसार, DGP पद को पहले आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित करना जरूरी है, तभी चयन प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
राज्य सरकार ने UPSC को छह वरिष्ठ अधिकारियों की सूची भेजकर इनमें से तीन नामों का चयन करने का अनुरोध किया था। इस पैनल में 1990 बैच के शत्रुजीत कपूर, 1992 बैच के ओपी सिंह और अजय सिंगल, 1991 बैच के एस.के. जैन और 1993 बैच के आलोक मित्तल तथा अर्शिंदर चावला शामिल थे।
UPSC ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का किया पालन
UPSC ने अपने जवाब में स्पष्ट कहा कि वर्तमान स्थिति में DGP पद तकनीकी रूप से खाली नहीं माना जा सकता, क्योंकि शत्रुजीत कपूर केवल अवकाश पर हैं, पद से हटाए नहीं गए हैं। ऐसे में कानून के मुताबिक चयन पैनल पर विचार नहीं किया जा सकता। UPSC ने साफ लिखा कि जब तक राज्य सरकार यह घोषणा नहीं करती कि शत्रुजीत कपूर अब DGP नहीं रहेंगे, तब तक नए DGP की नियुक्ति आगे नहीं बढ़ सकती।
पृष्ठभूमि: छुट्टी पर कपूर, ओपी सिंह कार्यवाहक DGP
शत्रुजीत कपूर को अगस्त 2023 में दो वर्ष के स्थायी कार्यकाल के लिए DGP नियुक्त किया गया था। हालांकि एक IPS अधिकारी की आत्महत्या के बाद उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया। उनकी अनुपस्थिति में 1992 बैच के अधिकारी ओपी सिंह को कार्यवाहक DGP बनाया गया है, जो 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
UPSC के निर्णय के बाद अब पूरा मामला हरियाणा सरकार के पाले में आ गया है। सरकार को या तो शत्रुजीत कपूर को औपचारिक रूप से पद से हटाने का निर्णय लेना होगा या उन्हें दोबारा कार्यभार सौंपना होगा। यही फैसला राज्य पुलिस प्रशासन की स्थिरता और भविष्य की नियुक्तियों की दिशा तय करेगा।