Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड में पीड़ित बच्चे के परिजन अब भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं। हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट परिजन सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। युग के पिता विनोद गुप्ता ने हिमाचल उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देते हुए एसएलपी दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
23 सितंबर को हाईकोर्ट ने जिला अदालत के फैसले में बदलाव करते हुए एक आरोपी तेजिंद्र पाल को बरी, जबकि दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। इसी निर्णय के विरोध में पीड़ित परिवार ने अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है।5 सितंबर 2018 को जिला अदालत ने तेजिंद्र पाल, चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। पुष्टिकरण के लिए मामला हाईकोर्ट भेजा गया, जहां सुनवाई के बाद दो आरोपियों की सजा उम्रकैद में बदल दी गई और सबूतों की कमी के आधार पर तीसरे आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी किया गया।
ये था पूरा मामला
वर्ष 2014 में 14 जून को शिमला के रामबाज़ार निवासी विनोद गुप्ता के बेटे चार वर्षीय युग का अपहरण किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी उसे रामचंद्रा चौक के पास एक किराये के मकान में ले गए, जहां एक सप्ताह तक उसे प्रताड़ित किया गया। इसके बाद आरोपियों ने मासूम को भराड़ी स्थित नगर निगम के पेयजल टैंक में जिंदा फेंक दिया।22 अगस्त 2016 को विक्रांत बख्शी की निशानदेही पर सीआईडी ने टैंक से युग की हड्डियाँ बरामद कीं और फिर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं परिजन
स्व. युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस आरोपी की संलिप्तता सबसे अधिक थी, उसे ही बरी कर दिया गया है। इसलिए उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में आग्रह किया गया है कि तीनों आरोपियों को फांसी की सजा ही दी जाए, जैसा कि निचली अदालत ने सुनाया था।उन्होंने कहा कि तीनों दोषियों ने उनके बच्चे को बेरहमी से यातनाएं दीं और जिंदा ही टैंक में फेंक दिया। सीआईडी ने मामले में गहन जांच कर सच सामने लाया था, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले से वे असंतुष्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है, हालांकि केस की सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।